झारखंड के विपक्षी नेताओं में संदेह की महामारी

राज्यसभा चुनाव में झारखंड में कांग्रेस और झामुमो 1 सीट निकालने में कामयाब तो हो गया लेकिन विपक्ष के कई नेताओं के बयान यह साबित कर रहे हैं कि झारखंड का विपक्ष अभी भी संदेह और शक के पौधे लगाने में ही व्यस्त है. विपक्ष का हर विधायक संदेह के घेरे में है. एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का खेल जारी है और भाजपा इस का आनंद उठा रही है.

कांग्रेस के दो विधायक जहां अपने ही वरिष्ठ नेताओं की नजर में विलेन बने हुए हैं, वहीं दो वामपंथी विधायकों पर भी छींटाकशी की जा रही है. मासस के निरसा से विधायक अरूप चटर्जी पर कुछ लोगों ने आरोप लगाए हैं, अरूप चटर्जी ने पलटवार किया और कहा कि वामपंथी अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं करते. अगर समझौता करना होता तो सचमुच अरूप चटर्जी झामुमो के साथ क्यों होते! अरूप चटर्जी ने जनता की लड़ाई लड़ी है. वह हर बात ताल ठोक कर कहते और करते हैं. ऐसे में जो लोग इन पर सवाल उठा रहे हैं, वह दरअसल विपक्षी एकता को कमजोर कर रहे हैं.

भाजपा की साजिश को समझने की जरूरत है. राज्यसभा की सीट जीत कर विपक्ष ने साबित कर दिया है कि यदि उनमें एकता बनी रहे तो वह ना केवल कड़ा मुकाबला करने में सफल होंगे बल्कि जीतेंगे भी.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *