नीतीश के खिलाफ बगावत के आसार!

बिहार राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर खड़ा है। राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के लगे आरोप और सीबीआई छापे के बाद जदयू और राजद में सियासी तनातनी तेज हो गई है। अब सवाल उठता है कि इस स्थिति में क्या महागठबंधन बरकरार रहेगा? राज्य में भाजपा को रोकने के लिए दोस्ती की गांठ और मजबूत होगी या फिर बिखर जाएगी? राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह सवाल अहम हो गया है।

वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मसले पर अपनी चुप्पी भले नहीं तोड़ रहे, लेकिन दोनों दलों के नेताओं में बयानबाजी तेज हो गयी है। वहीं तेजस्वी प्रकरण नीतीश सरकार के लिए बड़ा संकट बनकर खड़ा हो गया है। अगर तेजस्वी यादव को लेकर महागठबंधन टूटता है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा। भाजपा 2019 को लेकर रणनीति बनाने में जुटी गयी है। वह जानती है कि राज्य में महागठबंधन की गांठ जब तक कमजोर नहीं होगी, उसकी दाल गलने वाली नहीं है। उस स्थिति में वह हर हाल में महागठबंधन का बिखराव चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी से इस्तीफा मांगने के बाद अगर सरकार गिरती है तो नीतीश कुमार बीजेपी के साथ जाकर सरकार बना सकते हैं। लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश की इस कोशिश को उनके ही दल के विधायकों ने जोरदार झटका दिया है। सूत्रों के मुताबिक जेडीयू के अधिकांश मुस्लिम और यादव विधायकों ने बीजेपी के साथ जाने की बजाय अलग रास्ता अपनाने का मन बना लिया है। यानी पार्टी में फूट हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि जेडीयू के अधिकांश मुस्लिम और यादव विधायक बीजेपी से किसी तरह के गठबंधन के खिलाफ हैं। ऐसे में अगर नीतीश कुमार महागठबंधन तोड़कर एनडीए में शामिल होने की कोशिश करते हैं तो उन्हें अपनी ही पार्टी में सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।माना जा रहा है कि एनडीए में शामिल होने की दशा में 71 में से करीब 20 विधायक नीतीश के खिलाफ जा सकते हैं। पार्टी के 12 सांसदों में से 6 भी नीतीश के खिलाफ जा सकते हैं।

फिलहाल इसके लिए हमें इंतजार करना होगा। राजनीति क्रिकेट की तरह ही अनिश्चितताओं का खेल है। यहां कब बाजी पलट जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। नीतीश क्या स्टैंड अपनाते हैं, यह देखना होगा।

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