पत्थलगड़ी से ग्रामीणों का मोहभंग, कई गावों में उखाड़े पत्थर

पिछले कुछ सालों से पत्थलगड़ी के नाम पर संविधान की गलत व्याख्या कर भोले-भाले ग्रामीणों को भड़काया जा रहा था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि खूंटी के ग्रामीणों को यह बात समझ आ गई है कि उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए इन पत्थरों को गिराने का काम वे खुद कर रहे हैं।
खूंटी प्रखंड के कई गावों में आज ग्राम सभा के बाद पत्थर हटाने का कार्यक्रम हुआ। जिला प्रशासन की पहल पर पहली बार संविधान विरोधी पत्थर गिराए जा रहे हैं। पत्थर गिराने से पहले ग्रामीण पूरे विधि-विधान से इन पत्थरों की पूजा भी कर रहे हैं। खूंटी के सिलादोन पंचायत के चितराम गांव में पत्थर को हटाए जाने के साथ इसकी शुरुआत हो गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि अब वे विकास की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं। पिछले दिनों कुछ नेताओं ने उन्हें पत्थलगड़ी के नाम पर सरकार के खिलाफ उकसाया था और गांव में पत्थलगड़ी कर सरकार की योजना लेने से मना करने को कहा था। उन्होंने बताया कि बिना ग्रामसभा की अनुमति से कोई व्यक्ति अगर सरकार की योजना लेने की हिम्मत करता तो उसे जुर्माना देना पड़ता था।
बता दें कि खूटीं के गांवों में एक साल पहले ग्रामीणों को बरगला कर यूसुफ पूर्ति, बलराम समद और जॉन जुनास तिड़ू जैसे तथाकथित पत्थलगड़ी समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारे लिख पत्थलगड़ी की थी।

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