थर्ड फ्रंट की कवायद से बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें

मिशन 2019 की तैयारी में सभी पार्टियां मैदान में कूद गई हैं, कांग्रेस ने भी अपने तरीके से लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी टीम को सशक्त बनाने का काम शुरू कर दिया है। देखा जाय तो लोकसभा चुनाव में अब एक वर्ष का ही वक्त बचा है। उधर, बीजेपी जिस प्रकार तेजी से पूरे देश में एक के बाद दूसरे राज्य में सरकार बनाती जा रही है उसने पूरे विपक्ष को अपनी रणनीति पर समीक्षा करने को मजबूर कर दिया है। देश के कई क्षेत्रीय क्षत्रप और कुछ बड़े राजनीतिक दलों के नेता कांग्रेस नेतृत्व को अब शक की निगाह से देखने लगे हैं। उनका मानना है कि यदि इसी प्रकार पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी प्रदर्शन करती रही तो आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी हार तय है।

बहरहाल, कांग्रेस भी ये बात भलिभांति समझती है कि क्षेत्रीय दलों ने अगर कांग्रेस से किनारा कर लिया तो कांग्रेस की राह आसान नहीं होगी। इसीलिए जब भी किसी तीसरे फ्रंट की बात हवा में उछाली जाती है तो पार्टी नेता इसे सिरे से खारिज करते हैं। उनका मानना है कि भले ही रिजनल पार्टियों का कुछ राज्यों में अपना आधार है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अभी भी बीजेपी का विकल्प सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही है। जानकारों की मानें तो कांग्रेस थिंक टैंक इसलिए भी ऐसे कयास को ज्यादा तवज्जो नहीं देते क्योंकि उन्हें लगता है कि थर्ड फ्रंट के विचार को बीजेपी का भी सपोर्ट मिल सकता है जिससे आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्ष को कमजोर किया जा सके, और एक ऐसा मोर्चा बीजेपी के हित में होगा जिसमें कई विचारधारा के लोग एक साथ होंगे।

हालांकि थर्ड फ्रंट की बात भले ही अभी दूर की कौड़ी लग रही हो लेकिन इसकी एक झलक तो उत्तर प्रदेश में देखने को जरूर मिली, जहां धुर विरोधी रही एसपी और बीएसपी ने अगले हफ्ते होने वाले गोरखपुर और फूलपुर के लोकसभा उपचुनाव के लिए हाथ मिलाया है। उधर, टीआरएस के प्रमुख और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने गैर भाजपा और गैर दलों को तीसरे मोर्चे के लिए साथ आने का आह्वान किया है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गोवा में बीजेपी के बढ़ते कद ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के क्षत्रपों को भयभीत तो जरूर कर दिया है।

ऐसी उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी अब ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, केसीआर, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव पर पहले से ज्यादा हमलावर होगी और आने वाले महीनों में टीडीपी और डीएमके को साधे रखने की रणनीति पर काम करेगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में बीजेपी की दोबारा सरकार बनाने में ये क्षत्रप ही रोड़ा अटका सकते हैं। वहीं कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की काट के लिए कोई रणनीति अब तक पेश नहीं किया है और फिलहाल राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पंजाब और गुजरात पर जोर दे रही है।

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