झुकी सरकार, अन्ना ने तोड़ा अनशन

किसानों की स्थिति, चुनाव सुधार और लोकपाल सहित कई अन्य मांगों को लेकर पिछले 7 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को अपना अनशन तोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पीएमओ द्वारा भेजा गया ड्राफ्ट उन्होंने स्वीकार कर लिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दिल्ली के रामलीला मैदान पर पहुंचे और उनका अनशन खत्म कराया।

अन्ना ने अनशन खत्म करने का ऐलान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्‍यादा दाम देने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने बताया कि लोकपाल की नियुक्ति पर केंद्र जल्द फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि हम केंद्र को इन सबको पूरा करने के लिए 6 महीने का समय देंगे, वरना हम फिर से आंदोलन करेंगे।

अन्ना आंदोलन के बिहार प्रभारी संजय सिसोदिया ने कहा है कि इस आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने में हज़ारों अन्ना समर्थकों ने दिन रात संघर्ष किया है। पूरे देश में अन्ना के इस अभियान को बढ़ाने और सरकार के समक्ष पहुंचाने में इन कार्यकर्ताओं ने लगातार काम किया है। अन्ना की ओर से उन्हें बधाई। बता दें कि अन्ना हजारे 23 मार्च से अनशन पर थे, उनके सहयोगी दत्ता अवारी ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले अन्ना का वजन पांच किलोग्राम से ज्यादा घट गया है और अनशन की वजह से उनका रक्तचाप भी गिरा है।

इससे पूर्व अन्ना हजारे ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा, 'कई दिनों से देख रहा हूं कि कई लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं और मुझ पर झूठे आरोप लगाकर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने जीवन में बहुत आलोचना सहन की है और मुझे इससे कभी डर नहीं लगता ना ही मैं उससे दुखी होता हूं। मुझे देश हित के सिवा कुछ नहीं चाहिए, मुझे ना किसी से वोट मांगने हैं, ना कुछ और। दुख केवल इस बात का है कि मेरी आलोचना करने वाले सिर्फ झूठ बोलते हैं और उस पर बात नहीं करते जो मुद्दे मैंने आंदोलन में उठाए। फिर भी भगवान उनका भला करे। ‘

अन्‍ना हजारे की मांग
-किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्‍यादा दाम मिले।
-खेती पर निर्भर 60 साल से ऊपर उम्र वाले किसानों को प्रतिमाह 5 हजार रुपये पेंशन।
-कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा तथा सम्पूर्ण स्वायत्तता मिले।
-लोकपाल विधेयक पारित हो और लोकपाल कानून तुरंत लागू किया जाए।
-लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 44 और धारा 63 का संशोधन तुरंत रद्द हो।
-हर राज्य में सक्षम लोकायुक्त नियुक्‍त किया जाए।
-चुनाव सुधार के लिए सही निर्णय लिया जाए।

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