मेघालय में कांग्रेस या संगमा! दाँव पेंच जारी

मेघालय विधानसभा चुनाव के परिणामों की अस्पष्टता ने सियासत की दुकान में मोल भाव तेज़ कर दिया है. मेघालय में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाने के कारण सरकार बनाने को लेकर दांव-पेंच की राजनीति शुरू हो गई है. सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर दोनकुपर रॉय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के 6 विधायकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं. मीटिंग के बाद इस बात की घोषणा की जाएगी कि वो किसे समर्थन करेंगे, इसी के साथ यह भी तय हो जाएगा कि एनपीपी और कांग्रेस में से कौन मेघालय में सत्ता की कुर्सी पर काबिज होगा.

यूडीपी नेता दोनकुपर रॉय 19 मार्च 2008 से 19 मार्च 2009 तक मेघालय के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. मुख्यम उनका कार्यकाल 365 दिन का था. इधर, बीजेपी और कांग्रेस भी अपने नेताओं के साथ मीटिंग कर रही है. इसमें बीजेपी असम भवन में अपने नेताओं के साथ मीटिंग कर रही है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता किरण रिजिजू ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है कि पार्टी ने नव निर्वाचित विधायक एएल हेक को बीजेपी के विधायक दल का नेता बनाया गया है.

बीजेपी भी अपने सपोर्ट से गठबंधन की सरकार बनाने को लेकर पूरी ताकत लगा रही है. इस बाबत बीजेपी नेता और असम सरकार में मंत्री हेमंत विस्वा शर्मा नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता किरण रिजिजू और केजे अल्फोंस भी शिलांग पहुंच चुके हैं.

सतर्क कांग्रेस मेघालय में गोवा की ग़लती नहीं दोहराना चाहती है. सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी कांग्रेस गोवा और मणिपुर में हुई अपनी गलतियों से सियासी सबक़ सीख चुकी है. यही कारण है कि मेघालय के नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस पार्टी ने अपने तीन वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, कमलनाथ और मुकुल वासनिक को दिल्ली से शिलांग के लिए रवाना कर दिया था. इन तीनों नेताओं ने शिलॉन्ग में आने के बाद मेघालय में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी.

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