प्रो- मुस्लिम छवि से बाहर निकलना चाहती है कांग्रेस!

मिशन 2019 की तैयारी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष लगातार अपनी रणनीति बना रहा है। जनता के बीच पंहुचकर उनसे संवाद स्थापित करने से लेकर सियासी समीकरण सेट करने तक सभी बिन्दुओं पर विचार किया जा रहा है। कांग्रेस भी इस पर गहन मंथ कर रही है कि किस प्रकार लोकसभा चुनाव में उतरा जाए जिससे जनता के बीच बेहतर छवि उभर कर आए।
इन सब के बीच कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती प्रो मुस्लिम छवि से ऊपर उठना है। पार्टी के अंदरखाने इस बात को लेकर खूब चर्चा हो रही है कि आज के दौर में हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर ध्रुवीकरण की कोशिशों से निपटने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी जल्द ही मुस्लिम बुद्धिजीवियों और विचारकों के साथ बैठक करेंगे।
बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की पड़ताल के लिए बनाई गई एंटोनी कमेटी ने जो रिपोर्ट दिए थे उसमें यह स्पष्ट कहा गया था कि पार्टी की प्रो-मुस्लिम छवि के कारण पराजय मिली है। ऐसे में भविष्य के लिहाज से मुस्लिम वोटों के मद्देनजर कांग्रेस हर कदम सोच समझकर उठाना चाहती है।
दलितों और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद राहुल गांधी की नज़र अब बड़े मुस्लिम वोट बैंक पर है, पर उन्होंने मुस्लिमों से जुड़ने के लिए उन चेहरों को चुना है, जो कट्टरपंथी नहीं बल्कि उदारवादी और विद्वान समझे जाते हैं। राहुल इस बैठक के ज़रिए मुस्लिम समाज में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही बैठक का उद्देश्य मुस्लिम चेहरों से ये राय भी जानना है कि कैसे चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण को रोका जाए। राहुल इन लोगों से मिली राय को अपनी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल करेंगे।
दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई थी। पार्टी अब ये गलती दोहराना नहीं चाहती। मुस्लिम बुद्धिजीवियों, विचारकों के साथ राहुल के होने वाले संवाद में इतिहासकार, लेखक, पत्रकार और न्यायविद सहित तमाम क्षेत्रों से लोग शामिल किए जाएंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी इस आयोजन से जुड़े रहेंगे।

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