भूख से मौत पर समिति गठित, सरयू राय ने चला बड़ा दांव !

राज्य में भूख से हो रही मौतों को लेकर सरयू राय द्वारा एक समिति गठित कराए जाने से राज्य की राजनीति गरमा सकती है। इससे राज्य के मुखिया समेत कई आला अधिकारियों की भी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है जिन्होंने भूख से हुई मौतों को बीमारी में तब्दील कर दिया था। इसके साथ राज्य के शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली भी पर एक बार फिर सवाल उठाए जा सकते हैं। वहीं विपक्ष को एक बार फिर बैठे- बिठाए सरकार को घेरने का मौका मिल सकता है। लेकिन इन सब के बीच ये देखना ज्यादा दिलचस्प होगा कि समिति अपना रिपोर्ट कब सौंपती है क्योंकि इसे आनेवाले चुनाव में एक मुद्दे के रूप में मुनाया जा सकता है।

गौरतलब है कि राज्य में भूख से होने वाली मौतों के बारे में स्पष्ट संलेख तैयार करने के लिए सरकार ने निदेशक खाद्य, सुनील कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में सात सदस्य समिति गठित कर दी है। मंत्री सरयू राय के निर्देश पर गठित इस समिति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मनोनीत खाद्य सुरक्षा आयुक्त के झारखंड सलाहकार बलराम, राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य राकेश कुमार सिंह, भोजन का अधिकार, झारखंड के संयोजक अशर्फी नंद प्रसाद, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के डॉक्टर सुरनजीत प्रसाद के अलावा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एवं महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा नामित संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य में भूख से कथित मौतों की खबरें मीडिया में आने के बाद खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री सरयू राय ने विभागीय सचिव को एक पत्र लिखकर भूख से मौतों के बारे में एक स्पष्ट संलेख तैयार करने का निर्देश दिया था। मंत्री ने कहा था कि उक्त संलेख में मृतक के परिवार के सामाजिक स्तर की जानकारी, उसके राशन कार्ड, पेंशन और सरकारी योजनाओं से जुड़े होने, उन योजनाओं का लाभ मिलने की सूचना तथा उसके वृद्ध, विधवा, परित्यक्ता अथवा दिव्यांग श्रेणियों में होने अथवा ना होने जैसे बिंदुओं को संलेख का आधार बनाया जा सकता है। मंत्री ने लिखा था कि आए दिन भूख से मरने की खबरें समाचार पत्रों में छप रही हैं। भोजन का अधिकार से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आरोप लगाते हैं कि ऐसी मौतें भूख से हुई हैं। दूसरी ओर सरकार के अधिकारी प्रतिवेदन देते हैं कि ये मौतें किसी न किसी बीमारी से हुई हैं। मंत्री ने लिखा था कि भूख अथवा बीमारी, दोनों स्थितियों में मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। भोजन का अधिकार संविधान में मौलिक अधिकार है और कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। इसी निर्देश के आलोक में उक्त समिति का गठन किया गया है।

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