झारखण्ड में नेतृत्व परिवर्तन का खेल

-असंतुष्ट भाजपा सांसद- विधायक कर रहे बैठक

रघुवर दास ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने झारखंड के इतिहास में सीएम के पद पर सबसे लंबी पारी खेली है। रघुवर दास ने 28 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इस लिहाज से वो इस पद पर अब तक 1000 दिन रह चुके हैं। हालांकि जब से रघुवर दास झारखंड के गैर आदिवासी सीएम बने हैं तभी से उन्हें हटाए जाने की अटकलें भी गाहे- बगाहे चल रही हैं। इस साल 28 दिसंबर को रघुवर दास को सीएम बने तीन साल हो जाएंगे। इन तीन सालों में ऐसे कई मौके आए जब लगा की रघुवर दास की कुर्सी जानी तय है। पर इस बार कई संगठन और पार्टी के सांसद विधायक ही सक्रिय रोल अदा कर रहे हैं।

इसलिए कहा जा रहा है कि इस बार रघुवर की कुर्सी शायद ही बचे। इसके पीछे रघुवर दास द्वारा लिए गए कुछ नीतिगत फैसले भी हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार पार्टी आलाकमान भी राज्य में परिवर्तन का मूड बना चुका है। माहौल को देखते हुए भाजपा के कई सांसद सीएम पद के दावेदारों में अपना नाम शामिल करा रहे हैं। इतना ही नहीं ये सांसद अपने- अपने समर्थक विधायकों के साथ ताबड़तोड़ बैठकें भी कर रहे हैं। कुछ सांसद तो ऐसे हैं जो सीएम पद की रेस में नहीं हैं लेकिन समर्थक विधायकों के साथ बैठक करने में भी पीछे नहीं हैं। पिछले दिनों रांची के सांसद रामटल चौधरी के दिल्ली स्थित आवास पर भी कुछ इसी तरह की बैठक हुई। हालांकि, चौधरी सीएम पद के दावेदारों में शामिल नहीं हैं लेकिन उनकी चाहत है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो।

उधर, चर्चा यह भी है कि अगर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो रघुवर दास की पसंद नीलकंठ मुंडा होंगे। रामटल चौधरी द्वारा समर्थकों के साथ बैठक से पहले चतरा सांसद सुनील सिंह ने भी अपने घर पर झारखंड के विधायकों के साथ बैठक की थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुनील सिंह भी सीएम पद के दावेदार हैं। कोडरमा सांसद रविन्द्र राय का भी नाम चर्चा में है। उनके समर्थक उन्हें सीएम पद पर देखना चाहते हैं। राय प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
बहरहाल, जानकार मानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल किसी भी भाजपा शासित राज्य में नेतृत्व परिवर्तन करने को इच्छुक नहीं है। इस साल के आखिर में गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत कुछ राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं। लिहाजा, पार्टी आंतरिक उलझनों से हटकर इन राज्यों के चुनावों पर फोकस कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर किसी वजह से झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन होता भी है तो केंद्रीय नेतृत्व किसी सांसद की बजाय किसी विधायक को ही सीएम बनाना चाहेगा। बता दें कि इससे पहले दिनेश उरांव, शिवशंकर उरांव, सरयू राय आदि के नाम की चर्चा भी सीएम पद की रेस में चल रही थी।

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