सीएम रघुवर दास ने सदन में पेश किया 80200 करोड़ का बजट

-गांव, शिक्षा और रोजगार पर रहा मुख्य फोकस

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को वर्ष 2018-19 का 80200 करोड़ का बजट पेश किया। यह दूसरा मौका है जब राज्य सरकार एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के लिए जनवरी में बजट प्रस्तुत की हो. इस बजट में मुख्य फोकस शिक्षा, समाजिक सेवा, कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विभाग जैसे क्षेत्र रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से हमारी सरकार ने यह निश्चय कर रखा है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे गरीब व्यक्ति तक विकास कार्यों का लाभ पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में झारखण्ड विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है तथा उनके मार्गदर्शन में हम न्यू झारखण्ड बनाने के लिये कृत संकल्प है। योजना बनाओ अभियान, जनसंवाद, बजट पूर्व संगोष्ठियां, सखी मण्डलों का सुदृढ़ीकरण, 20 सूत्री समितियों का पुनर्गठन, पंचायत सचिवालयों का गठन, वार्ड विकास समिति का गठन आदि कुछ ऐसे प्रयास हमने प्रारंभ किए हैं, जिससे जन-जन की आवाज सुनी जा सके और जन आंकाक्षाओं के अनुरूप हम अपने सरकार का कार्य सुगठित कर सकें। इसी क्रम में डोभा निर्माण, दो दुधारू गायों की योजना, कृषि सिंगल विण्डो, कौशल विकास कार्यक्रम, जन-वन योजना, जन-धन योजना, मुद्रा योजना, प्रज्ञा केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण, आदि कार्यक्रमों के माध्यम से हम सरकार को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के प्रति हमारी सरकार ने कई ऐसिहासिक कार्य किए हैं। इनमें विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा एक लाख से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं एवं 50 हजार और नियुक्तियां जून, 2018 तक की जायेंगी। स्थानीय नीति की घोषणा होने के कारण इन नियुक्तियों में 95 प्रतिशत से अधिक स्थानीय उम्मीदवार की ही नियुक्ति की गई है। झारखण्ड आन्दोलन के पुरोधा विनोद बिहारी महतो की स्मृति में ‘‘विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय’’ की स्थापना धनबाद में नवम्बर, 2017 में की गई है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत झारखण्ड के 68 लाख परिवारों में से 57 लाख गरीब परिवारों का प्रति परिवार दो लाख रुपये का बीमा होगा, जिसमें एक-दो नहीं, बल्कि 980 छोटी-बड़ी बीमारियां कवर होंगी।

वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई पहल किए गए हैं, '108' एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की गई है, जो चैबीसों घण्टे आपात परिस्थियों के लिए 108 कॉल सेन्टर से संचालित है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में राज्य में वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 7,000 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क की व्यवस्था उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर अब 31,705 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क उपलब्ध करायी गई है। वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 3,500 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर 26,788 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध करायी गई है। इसके साथ ही वर्ष 2014 तक 22,636 विद्यालयों में शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध थी जिसे बढ़ाकर सभी 38,904 विद्यालयों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी गई है।वर्ष 2014 तक 30,803 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ाकर 38,132 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी गई है।

वहीं हर गांव में बिजली पहुंचाने के प्रति भी सरकार कृतसंकल्प है इसलिए वर्ष 2014 तक कुल 2,932 ग्राम अविद्युतीकृत थे, दिनांक 31 दिसम्बर, 2017 तक इन सभी ग्रामों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। वर्ष 2014 में सिर्फ 38 लाख घरों में बिजली थी और 30 लाख से अधिक घरों में अंधेरा था। विगत् तीन वर्ष में 8 लाख घरों में बिजली पहुंचा दी गई है और वर्ष 2018 की दीपावली तक शेष सभी घरों में बिजली पहुंचा दी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड राज्य बनने के समय से 2015 तक राज्य में मात्र 3 चिकित्सा महाविद्यालय कार्यरत थे। गत दो वर्षों में पलामू हजारीबाग एवं दुमका में नए चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त तीन चिकित्सा महाविद्यालयों से सबंद्ध 500 शय्यावाले अस्पतालों की स्वीकृति कुल 1,475.02 करोड़ रुपये की लागत पर दी गई है। शहीद ग्राम विकास योजना राज्य में पहली बार प्रारंभ की गई है, जिसके अन्तर्गत राज्य के वीर सपूतों के जन्मभूमि के समग्र विकास हेतु कार्य किया जा रहा है।

गांव की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विश्व बैंक सम्पोषित 500 करोड़ की लागत से ‘‘तेजस्विनी योजना’’ तथा 1,500 करोड़ रुपये की लागत से ‘‘जोहार परियोजना’’ की शुरूआत की गई है। राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास एवं रोजगार सृजन निमित्त मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने शासन को पारदर्शी तथा जनता के सरोकार को सर्वोपरि बनाए रखने का प्रयास किया है। गत वित्तीय वर्ष की भांति इस वर्ष के बजट के निर्माण के क्रम में हमने राज्य के प्रत्येक प्रमण्डल में जाकर समाज के प्रमुख वर्गों से उनकी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उन्हें इस साल के बजट में समावेशित करने का प्रयास भी किया है। इस प्रयास में मैंने राज्य 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के मानिन्द सदस्यों तथा स्टेकहोल्डर्स की बैठकें भी की हैं, जिसमें आम जनों के साथ राज्य के मंत्रियों, माननीय सांसदों, माननीय विधायकों तथा प्रबुद्ध अर्थशास्त्रियों का भी सुझाव प्राप्त किये हैं एवं उन्हें समावेशित किया है। ऐसा करने का उद्देश्य यह है कि आम जनता राज्य की बजट को अपना बजट समझे, कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में वे भी पर्यवेक्षकीय भूमिकाएं अदा करें और उन्हें भी अपनी जवाबदेही का एहसास रहे।

मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए सदन के सामने राज्य का सकल बजट रुपये 80,200 करोड़ रुपये का पेश किया जिसमें राजस्व व्यय के लिए 62,744.44 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय के लिए 17,455.56 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। बजट में प्रावधानित सकल राशि को यदि प्रक्षेत्र के दृष्टिकोण से देखा जायेगा तो सामान्य क्षेत्र के लिए 22,689.70 करोड़ रुपये सामाजिक क्षेत्र के लिए 26,972.30 करोड़ रुपये तथा आर्थिक क्षेत्र के लिए 30,538 करोड़ रुपये उपबंधित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को अपने कर-राजस्व से करीब 19,250 करोड़ रुपये तथा गैर कर-राजस्व से 9,030 करोड़ रुपये केन्द्रीय सहायता से करीब 13,850 करोड़ रुपये केन्द्रीय करों में राज्यांश से 27,000 करोड़ रुपये लोक ऋण से करीब 11,000 करोड़ रुपये तथा उधार एवं अग्रिम की वसूली से करीब 70 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रचलित मूल्य के आधार पर झारखण्ड राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) 3,08,785 करोड़ रुपये आकलित किया गया है। यह वर्ष 2017-18 के 2,79,452 करोड़ रुपये की तुलना में 10.50 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। स्थिर मूल्य पर राज्य का जीडीपी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2,43,032 करोड़ रुपये जीडीपी अनुमानित है, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष के 2,27,066 करोड़ रुपये की तुलना में 7.03 प्रतिशत अधिक है।

राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2017-18 में कृषि एवं सम्बद्ध प्रक्षेत्रों का योगदान 14.97 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 70,468 रुपये होने का आकलन है, जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में 64,823 रुपये था। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा 7,494.45 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो कि आगामी वित्तीय वर्ष के अनुमानित जीडीपी का 2.43 प्रतिशत है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए प्रस्तावित कुल बजटीय उपबंध 80,200 करोड़ रुपये में से सर्वाधिक व्यय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज क्षेत्र में 11,771.16 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 12.39 प्रतिशत की दर से 1,297.46 करोड़ रुपये अधिक है। इसी प्रकार, शिक्षा प्रक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11,181.49 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 6.31 प्रतिशत की दर से 663.85 करोड़ रुपये अधिक है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में कृषि एवं जल संसाधन प्रक्षेत्र के लिए 6,421.64 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 14.86 प्रतिशत की दर से 830.72 करोड़ रुपये अधिक है।

स्वास्थ्य प्रक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 3,826.07 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 23.18 प्रतिशत की दर से 720.10 करोड़ रुपये अधिक है। इसी प्रकार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में नगर विकास एवं पेयजल तथा स्वच्छता प्रक्षेत्र के लिए 5,357.70 करोड़ रुपये का बजट उपबंध प्रस्तावित है, जो चालू वर्ष की तुलना में 17.70 प्रतिशत की दर से 805.88 करोड़ रुपये अधिक है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में पांच बिन्दुओं पर विशेष फोकस रहेगा

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुणा करना।
  • रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना।
  • अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास।
  • महिला सशक्तिकरण।
  • पिछड़े जिलों/प्रखण्डों का समेकित विकास।

इसके साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा आधारभूत संरचना यथा- पेयजलापूर्ति, नगरीय विकास, गांव को सड़क से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में विद्युत आपूर्ति पहुंचाने पर भी केन्द्रित रहेगा।

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