छठ पर विवाद बढ़ा तो मोदी ने तेज़स्वी को कहा बच्चा

एक दूसरे पर सियासी हमला करते-करते महापर्व छठ की मर्यादा भूलने वाले सुशील मोदी और तेज़स्वी यादव ने आज फिर एक दूसरे पर शब्दों के तीर चलाये। राजद ने तो यह कहते हुए मामले के पटाक्षेप की कोशिश की कि सुशील मोदी के उकसावे वाले बयां पर तेजस्वी ने ऐसी टिप्पणी की, लेकिन सुशील मोदी ने तेजस्वी को बच्चा कहकर एकबार फिर सियासी दांव-पेंच चल दिया। मोदी ने कहा कि तेजस्वी मेरे कारण पद से हटा है, इसलिए उसका गुस्साना स्वाभाविक है। लगे हाथों मोदी ने यह भी कह दिया कि तेज़स्वी अभी बच्चा है, इसलिए उसे गाली देने का हक है।

इस बीच स्पाइनल और शुगर से जूझ रही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नहाय खाय के साथ अपना छठ अनुष्ठान प्रारंभ किया। वो लम्बे अरसे से महापर्व छठ करती हैं, महापर्व के दौरान उन्होंने कभी भी कोई सियासी टिप्पणी नहीं की। लेकिन राजद और भाजपा के बयानवीरों पर हिंदूवादी संगठनों और प्रबुद्ध लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से बात कर हमने यह समझने की कोशिश की कि लोग राजनीति के इस धार्मिक प्रदुषण पर क्या सोचते हैं !

शिवसेना के बिहार प्रमुख कौशलेन्द्र सिंह ने कहा कि लालू परिवार को घेरते-घेरते सुशील मोदी ने छठ महापर्व पर बोलकर महापाप कर दिया। इन्होने कहा कि मोदी राज ठाकरे की भाषा बोलने लगे हैं। धर्म की राजनीति करने से इन्हें बचना चाहिए। शिवसेना के बिहार प्रमुख इस बात पर आश्चर्य करते हैं कि सुशील मोदी आखिर इस तरह की भाषा कैसे बोल रहे हैं! वो इस बात पर भी आश्चर्यचकित हैं कि भाजपा नेता ऐसी बातें बोल गए |

 

 

 

भारतीय जनक्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव आरडी मिश्र कहते हैं कि छठ पर्व पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी बिहारियों का अपमान है। ऐसी टिप्पणी कर हिन्दू धर्म का अपमान किया गया है। महापर्व छठ के पवित्र अवसर पर जान बूझकर ऐसी टिप्पणी की जा रही है ताकि हिंदू भाईयों, माताओं, बहनों को ठेस पहुंचे | इस महापर्व के अवसर पर ऐसी किसी भी कोशिश की वो कड़ी निंदा करते हैं और ऐसे लोगों को सावधान भी करते हैं |

 

 

 

 

युवा व्यवसायी मनीष कुमार कहते हैं कि राजनीतिज्ञों को ऐसी टिप्पणी करने से परहेज़ करना चाहिए। यह कहते हैं कि छठ मईया तुरंत फल देती हैं, वो ऐसे लोगों को माफ़ करें। मनीष कहते हैं कि शुचिता और सादगी के इस महापर्व पर कुछ भी सोच समझकर बोलने की परम्परा है | आम आदमी भी इस बात का ख्याल रखता है कि कोई त्रुटी ना हो | फिर इतने बड़े पदों पर बैठे लोगों का ऐसा बोलना बेहद क्षुब्ध करने वाला है| सारे लोग, सम्भाल कर बोलें |

 

 

 

 

 

गाँधी स्मारक समिति के पूर्व सचिव और वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रभूषण पाण्डेय कहते हैं कि आस्था के महापर्व छठ में शामिल होने का अधिकार सबको है। सबको अपने कर्मों का फल मिलता है , लेकिन किसी पर भी टिप्पणी उचित नहीं है। कौन किस भाव में किसकी पूजा करता है, उसपर किसी को टिप्पणी का अधिकार नहीं है | भगवान भाष्कर और छठी मैया का यह पावन पर्व तो हमारी समरसता की धरोहर है | कृपया नेतागण इस बात का ख्याल अवश्य रखें | समरसता और भाईचारा बनाएं रखें | छठी मैया सबको विवेक दें |

 

 

 

अधिवक्ता नरेंद्रदेव कहते हैं कि गंगा मईया कभी नहीं कहती कि कौन मेरे पानी में खड़ा होकर छठ करेगा और कौन नहीं ! ऐसे में इस तरह के बयानों से केवल कटुता बढती है। महापर्व छठ के बहाने राजनीति करने की इस कोशिश की हर तरफ आलोचना हो रही है। लोगों को लगने लगा है कि सियासत ने अपनी सारी सीमायें लाँघ दी है। हे छठी मईया , इन राजनीतिज्ञों को क्षमा करें।

 

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