मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के सामने ‘धनकुबेर’ की चुनौती

पिछले 22 वर्षों से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस इस बार पूरी शिद्दत से वापसी करने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने टिकट बंटवारे में जातीय समीकरण साधे हैं. पाटीदारों, ओबीसी और दलित नेताओं को अपने खेमे में जोड़कर पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की है. पार्टी ने आक्रामक रणनीति अपनाई है. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी को घेरने के लिए पार्टी पूरा जोर लगा रही है. रूपानी राजकोट पश्चिम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने उन्हें टक्कर देने के लिए राजकोट पूर्व से चुनाव लड़ने वाले अपने नेता इंद्रनील राज्यगुरु को उतारा है. इंद्रनील राज्यगुरु फिलहाल राजकोट-पूर्व विधानसभा क्षेत्र से विधायक है. इंद्रनील पर 5 केस चल रहे हैं. इंद्रनील को स्थानीय लोग 'धनकुबेर' के नाम से जानते हैं.

कांग्रेस के लिए राजकोट पूर्व की सीट सुरक्षित मानी जाती हैृ. इसके बावजूद इंद्रनील को सुरक्षित सीट से हटाकर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के खिलाफ उतारा है. राज्यगुरु राज्य के इस साल के सबसे धनी प्रत्याशी हैं. यहां बता दें कि राज्यगुरु ने पहले ही घोषणा की थी कि सीएम विजय रुपाणी राज्य में जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, वह उनके खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. राज्यगुरु ने अपने चुनावी शपथ पत्र में 141 करोड़ की संपत्ति घोषित की है. राज्यगुरु कांग्रेस के सबसे बड़े फाइनेंसर हैं. उधर, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पर्चा दाखिल करते हुए अपनी सम्पत्ति का जो ब्योरा दिया है, उसके पास वह पास 9.08 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. यानी सम्पत्ति के मामले के मुख्यमंत्री कहीं नहीं टिकते.

राजकोट पश्चिम सीट पर दशकों से बीजेपी का कब्जा रहा है. यह सीट बीजेपी के लिए काफी भाग्यशाली रही हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी भी इसी सीट से उपचुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे. रूपाणी के लिए भी यह सीट काफी लकी रहा. 2014 में हुए उपचुनाव में जीत हासिल करने के दो साल बाद ही रूपाणी प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए.

राजकोट पश्चिम सौराष्ट्र क्षेत्र की सबसे बड़ी विधानसभा है. इस विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा करीब 55 हजार पटेल वोटर हैं. इसके अलावा व्यापारी वर्ग की तादाद लगभग 30 हजार है. ब्राह्मण जाति के 28 हजार और राजपूत जाति के 12 हजार वोटर इस इलाके में हैं. जबकि 25 हजार के आस-पास पिछड़ी जातियों का वोट बैंक है. इस सीट पर 12 हजार दलित और 10 हजार मुस्लिम और लगभग 3 हजार जैन समुदाय के लोग हैं. ऐसे में देखना होगा कि पाटीदारों को लुभाने में बीजेपी कितना कामयाब होती है. अगर पटेल वोटर का सही साथ नहीं मिला तो रूपाणी की राह मुश्किल भरी हो सकती है. ब्राह्मण समाज से आने वाले राज्यगुरु से कांग्रेस को उम्मीद है कि वो रूपाणी को हरा देंगे. पटेल समुदाय में बीजेपी के प्रति नाराजगी भी कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण की तरह है.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *