मोतिहारी में वीसी का बिहारी भगाओ पॉलिटिक्स

-सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बीएचयू की तरह सुलगा रहे हैं कुलपति

मोतिहारी स्थित महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय कैंपस, ज्ञान के इस मंदिर को यहां के कुलपति ने कई दिनों से राजनीति का अखाड़ा बना दिया है. उबल रहे छात्रों और अनशनकारी शिक्षकों की स्थिति देखकर लग रहा है जैसे यह कैंपस भी बीएचयू की राह पर चल पडा है. बिहार में ही बने इस विश्वविद्यालय से लगातार बिहारी शिक्षकों को निकाला जा रहा है. तस्वीर बेहद भयावह है. प्रशासन सतर्क है, वीसी के कारनामों का पुलिंदा दिल्ली भेजा गया है. अब इन्तजार है दिल्ली के हस्तक्षेप का. अगर जल्दी शिक्षकों को न्याय नहीं मिला तो यह ज्ञान मंदिर आन्दोलन स्थल बनकर रह जायेगा. वीसी के एंटी बिहारी होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है.

मामला जूलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमित रंजन और बायोटेक के डॉ शशिकांत रे को गलत तरीके से टर्मिनेट करने को लेकर है. बिना किसी मजबूत कारण के वीसी ने इन्हें यह कहते हुए टर्मिनेशन लैटर थमा दिया कि उन्हें एक महीने का अतिरिक्त वेतन दिया जायेगा. ऐसा तो किसी निजी कंपनी में भी नहीं होता. टर्मिनेशन से पहले किसी आरोप की जांच के लिए कमिटी बनाई जाती है, आरोपी को कमिटी के सामने अपना पक्ष रखना होता है. फिर शासी समिति किसी भी आरोप पर बिन्दुवार सभी सम्बंधित पक्षों को सुनकर फैसला सुनाती है. लगता है यहां वीसी ने इसे अपना निजी चारागाह समझ लिया है.वीसी के असंवैधानिक आदेश के खिलाफ दोनों शिक्षक अनशन पर बैठ गए हैं, छात्र भी शिक्षकों के समर्थन में उतरे हुए हैं, इससे टकराव की स्थिति बन गयी है.

यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक ने बताया कि राजनीति करते-करते यहां के वीसी इतने नीचे गिर गए हैं कि वो महिला शिक्षकों का इस्तेमाल कर कईयों को फसाने की धमकी भी दे रहे हैं. ऐसे ही एक झूठे मामले का भय दिखा कर कुछ समय पहले एक शिक्षक डॉ संदीप से जबरन इस्तीफा लिखवा लिया गया था. बताया गया कि ऐसे कई मामले की वज़ह से कई वरिष्ठ शिक्षक सहमे हुए हैं.

बिहारी सम्मान के इसी सवाल पर छात्र राजद के अध्यक्ष अवनीश कुमार यादव ने विजयादशमी पर वीसी का पुतला दहन करने की घोषणा की है. अवनीश ने बताया कि वीसी रावण की तरह अहंकारी हो गए हैं, इसलिए बिहारी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसे रावण का दहन करना जरुरी है.

कैंपस के एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत से ही वीसी ने बहाली में भारी गड़बड़ी की है, वो यहां राजस्थान और पहाड़ी लॉबी बनाना चाह रहे हैं. ऐसी ही एक गड़बड़ी की वज़ह से केन्द्रीय विश्विद्यालय झारखंड में सीबीआई जांच चल रही है, तथा वहां के पहले वीसी, रजिस्ट्रार और कुछ और अधिकारीयों को एचआरडी ने हटाया.

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