लोकसभा सीटों के उपचुनाव पर पूरे देश की रहेगी नजर!

इस साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा की 4 सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर पूरे देश की नजर रहेगी। देश में सरकार की लोकप्रियता और विपक्ष की तैयारियों की नब्ज क्या है इस लिहाज से ये उपचुनाव अहम हो सकते हैं अलग -अलग कारणों से अलग-अलग राज्यों में लोकसभा की सीटें खाली हो रही हैं या हो चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार जल्द ही 4 सीटों के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। लोकसभा की इन चारों सीटों के चुनाव जहां विपक्ष के लिए अपने पक्ष में हवा बनाने का मौका होगा और उससे पहले यह दिखाना होगा कि वे एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं, तो वहीं बीजेपी अपनी विजय अभियान जारी रखते हुए आम चुनाव से पहले विपक्ष को और हतोत्साहित करने की पूरी कोशिश करेगी।

दोनों के लिए ये उपचुनाव इसलिए महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं, क्योंकि इनके नतीजों से ही मिशन 2019 की झलक मिल सकेगी। बीजेपी इन उपचुनाव को लेकर इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से दो अकेले यूपी से ही हैं। इनके अलावा पंजाब की गुरदासपुर सीट भी बीजेपी ने 2014 में जीती थी। ऐसे में उसकी सबसे बड़ी चुनौती इन सीटों को बरकरार रखने की होगी। गुरदासपुर सीट विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई है। वहां 27 अक्टूबर से पहले चुनाव होने हैं। वहीं, चुनाव आयोग के अनुसार यूपी की दो और वेस्ट बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव कराने के लिए अभी पर्याप्त समय हैं। ऐसे में वहां चुनाव कब होंगे, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को विधान परिषद जाने के बाद अब उन्हें लोकसभा की सदस्यता छोड़नी होगी। इस बीच पश्चिम बंगाल में उलबेरिया से टीएमसी सांसद सुलतान अहमद के निधन होने से यह सीट खाली हो गई है। गुरदासपुर सीट विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई है। कायदे से इन चारों ही सीटों पर बीजेपी की साख टिकी है। इसकी वजह यह है कि यूपी की दोनों और गुरदासपुर की सीट बीजेपी के पास ही रही है। ऐसे में अगर इन तीनों में से किसी भी सीट से अगर बीजेपी को नुकसान होता है तो ऐसे में उसके लिए यह बुरी खबर होगी। इसका सीधा मेसेज न सिर्फ योगी आदित्यनाथ, बल्कि खुद नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी जाएगा।

उधर, पंजाब में गुरदासपुर सीट को लेकर भी बीजेपी गंभीरता से उम्मीदवार की खोजबीन कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विनोद खन्ना के परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाने की संभावना पर भी विचार हो सकता है। राज्य में कांग्रेस की सरकार है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी-अकाली दल को करारी हार मिली थी। इसी वजह से पार्टी हाल ही में आवास एवं शहरी कार्य विभाग मंत्री बनाए गए हरदीप सिंह को उम्मीदवार बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल की उलबेरिया सीट टीएमसी के पास है। बीजेपी टीएमसी से यह सीट जीतने के लिए पूरी ताकत लगाएगी।

वहीं इन उपचुनाव में उस सवाल का भी जवाब मिलेगा की मिशन 2019 की भाजपा के अभियान के खिलाफ विपक्ष कितना एकजुट हो पाया है।

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