8 दिन पहले ही खत्म हो जायेगा विधानसभा का बजट सत्र

-सीएस और डीजीपी के सवाल पर सरकार और विपक्ष का अड़ियल रवैया

झारखण्ड की जनता सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पिस रही है. जनता के सर्वोच्च मंच यानि विधानसभा में इस बार जैसे-तैसे बजट तो पास हो गया लेकिन दोनों पक्षों की हठधर्मिता की वज़ह से आम लोगों के सवाल सदन में नहीं उठ सके. मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और डीजीपी तथा एडीजीपी को हटाने के सवाल पर सदन नहीं चल पाया. इस मसले पर जहां विपक्ष कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था वहीँ सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ कुछ बोलने को तैयार नहीं थी. ऐसे में जो संकेत मिल रहे हैं उसके अनुसार 17 जनवरी से 7 फरवरी तक चलने वाले विधानसभा के बजट सत्र का समापन 8 दिन पहले ही हो सकता है.

विपक्षी विधायकों ने आज भी इन आरोपी अधिकारियों का सवाल उठाया. हंगामे के बाद सदन की कार्रवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी. इसके बाद कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, उसमें भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया, ऐसे में आसार हैं कि कल से ही इस सत्र का समापन हो जाये.

सवाल यह नहीं है कि विधानसभा का सत्र कब समाप्त होगा! सवाल यह है कि आखिर सरकार सुन क्यों नहीं रही! यह हठधर्मिता क्यों! सदन के सुचारू संचालन की प्राथमिक जिम्मेवारी सरकार की होती है. अगर सरकार विपक्ष की हर बात सिरे से ही ख़ारिज कर देगी तो प्रदेश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था कैसे चलेगी! क्या मेसेज जायेगा जनता के बीच! लोगों को लग रहा है कि कुछ छुपाने की कोशिशें हो रही है. विपक्ष भी पहले दिन से अड़ा हुआ है, क्या इन अधिकारियों के अतिरिक्त और कोई मुद्दा विपक्ष के पास नहीं है.

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