सिंधिया को घेरकर चुनाव जीतना चाहती है BJP !

मध्यप्रदेश में दो विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। इस बीच बीजेपी नेताओं ने स्थानीय नेता और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने की रणनीति बनाई है, ताकि वे बीजेपी के प्रति आक्रामक न हो सकें, और घिर जाएं। देखा जाय को बीजेपी राजस्थान में हुए हार से परेशान है और नहीं चाहती है कि कांग्रेस का युवा ब्रिगेड हावी हो।

बीजेपी उपचुनाव वाले दोनों क्षेत्रों में सिंधिया की राजनीतिक जमीन को कमजोर कर इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उन पर बढ़त हासिल करना चाहती है। उपचुनाव राज्य के शिवपुरी जिले के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में होने जा रहे हैं। ये दोनों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना के अंतर्गत आते हैं। इस इलाके में सिंधिया राजघराने से जुड़े अन्य लोग भी प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। वर्तमान में शिवपुरी से भाजपा की विधायक यशोधरा राजे सिंधिया हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य को सीधे तौर पर विकास विरोधी करार दे चुके हैं। उनका तर्क है कि अगर इस क्षेत्र के लोगों का विकास हो गया और लोग समझदार हो गए, तो वे सिंधिया से सवाल करने लगेंगे। सिंधिया इसलिए विकास नहीं चाहते। मतलब यह कि एक सांसद अपने फंड से विकास कार्य नहीं कराता और मुख्यमंत्री की चलाई विकास की बयार को दिल्ली से आकर रोक देता है। राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने तो सिंधिया पर हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि इस इलाके का जो विकास हुआ है, उससे ज्यादा तो कोई सड़ा-गला सांसद भी कर देता। वह चुनाव के बाद विकास की हकीकत बताने के लिए पत्रकारों का भ्रमण कराएंगे।

जानकारों की मानें तो भाजपा के पास वर्तमान में अपनी उपलब्धियां बताने के लिए कुछ भी नहीं है। किसान बदहाल हैं, निराश होकर आत्महत्या कर रहे हैं, हक मांगने वाले किसानों पर गोली चलाई गई। कर्मचारी आंदोलन के रास्ते पर हैं। व्यापम घोटाले से हजारों युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो चुका है, इस घोटाले की जांच से जुड़े लोगों की मौत हुई, सो अलग। बेरोजगारों की फौज आक्रोश में है। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी ने सबसे आसान तरीका सोचा है कि क्यों न सिंधिया को निशाना बनाया जाए।"

उन्होंने कहा, "राज्य में हर क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। सभी जानते हैं कि सांसद अपने फंड से उतना विकास कार्य नहीं करा सकता, जितना राज्य सरकार करा सकती है। मगर भाजपा अपनी नकारात्मक राजनीति के तहत कोलारस व मुंगावली के विकास के मुद्दे पर सिंधिया को घेरने का प्रयास कर रही है, लेकिन यह नहीं बता रही है कि राज्य में 15 साल और केंद्र में चार साल से सरकार किसकी है।"

राज्य के जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा तो सिंधिया के गरीब और आदिवासी के घर जाने पर भी चुटकी लेते हैं। उनका कहना है, "राजा का काम यह थोड़े है कि वह गरीब के यहां खाना खाए, बल्कि उसकी कोशिश यह होनी चाहिए कि गरीब उन जैसा खाना खाए।"एक तरफ जहां सरकार और संगठन से जुड़े लोग सीधे सिंधिया पर हमला कर रहे हैं, वहीं सिधिया व्यक्तिगत हमलों से बच रहे हैं। सिंधिया लोगों से अपील यही कर रहे हैं कि "इन उपचुनाव के नतीजों का प्रदेश ही नहीं, देश में बड़ा संदेश जाने वाला है, इसलिए यहां भाजपा को ऐसा सबक सिखाएं कि वे उसे भुला न पाएं और बोरिया बिस्तर बांधकर उन्हें जाने को मजबूर होना पड़े। "

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