भाजपा ने यशवंत सिन्हा को बताया अनर्थशास्त्री

भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने यशवंत सिन्हा के आरोपों के बाद उनपर प्रत्यारोप तेज़ करा दिया है. रविशंकर प्रसाद के बाद इसी कड़ी में भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त ने गुरुवार को कहा कि यशवंत सिन्हा कभी भी अर्थशास्त्री नहीं रहे, सिन्हा एक अनर्थशास्त्री हैं. मस्त यहीं नहीं रुके, उन्होंने अटल जी की सरकार पर भी निशाना साध दिया और कहा कि उस वक़्त के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, यह एक अनर्थशास्त्री वित्त मंत्री ही कर सकता है.

मस्त ने यशवंत सिन्हा की मंशा पर ही सवाल उठा दिये. इन्होने कहा कि महत्वपूर्ण ये नहीं है कि यशवंत क्या कह रहे हैं, महत्वपूर्ण यह है कि वह ऐसा क्यों कह रहे हैं. वीरेंद्र सिंह मस्त ने लगे हाथों यह भी कह दिया कि उन्हें दर्द किसी और बात का है और वो बोल कुछ रहे हैं.

इशारों में वीरेंद्र सिंह मस्त जैसे कई और नेताओं ने यह समझाने की कोशिश की है कि राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा तरजीह नहीं दिए जाने से यशवंत खफा हैं और ऐसी बातें कर रहे हैं.

हालाँकि यशवंत मामले में मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री ने भी यह कहा है कि जीएसटी के बाद बाज़ार की स्थिति बदतर हुई है. सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और शिवसेना ने भी यशवंत की बातों का समर्थन किया है.

यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा के लेख के बाद यशवंत ने अपने लेख पर एकबार सार्वजनिक तौर पर फिर से अपनी बातों को दुहराया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बेशक कुछ अच्छे फैसले किये हैं लेकिन नोटबंदी और जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है. लगातार बेरोज़गारी बढ़ रही है, बैंकों का एनपीए 8 लाख करोड़ पहुँच गया है. बैंकों ने नए लोन देना बंद कर दिया है.

इस मामले का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि यशवंत के उठाए मुद्दों पर बात करने की बजाय इसका राजनीतिकरण किया जा रहा है. हो सकता है कल कोई और नेता कुछ बोल दे और मामले का असली पक्ष गौण ही हो जाये.

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