झामुमो तय करे शराब चाहिए या शराबबंदीः भाजपा

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक कुणाल षाड़ंगी के उस बयान की कड़ी निंदा की है जिसमें कुणाल षाड़ंगी ने कहा था कि विधानसभा के अंदर विधायकों की सुविधा के लिए शराब की दुकान खोलने पर राज्य सरकार को विचार करना चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इसे ओछी मानसिकता का परिचायक बताया। कहा कि अब वह दिन दूर नहीं कि जब विपक्षी नेता यह भी मांग कर बैठेंगे की उनके सुविधा के अनुसार उनके घरों के भीतर शराब की दुकान खोली जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन की शुरूआत शराबबंदी के खिलाफ आंदोलन से हुई थी। आज उसी दल के विधायक का यह कहना है कि विधानसभा परिसर के भीतर शराब की दुकान खोली जाए, इससे ये साफ है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा गुरु जी का भी आदर नहीं करती।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सरकार ने शराब की बिक्री पर नियंत्रण के लिए उसे अपने हाथों में ले लिया है। जिसके कारण दुकानों की संख्या में भारी गिरावट आई है और शराब की बिक्री में भी काफी कमी आई है। ऐसे में प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन का भी अपने विधायक कुणाल षाड़ंगी की बातों से सहमत होना दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ओर जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए झामुमो के नेता शराबबंदी की मांग करते हैं वहीं दूसरी ओर विधायकों की सुविधा के लिए विधानसभा परिसर के अंदर इसकी बिक्री की वकालत करते हैं। इससे इन की दोहरी मानसिकता स्पष्ट हो जाती है

वहीं प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बर्णवाल विपक्ष पर निशाने साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा मंदिर के समान होता है उस मंदिर में शराब की दुकानें खोलने के लिए कहना मानसिक दिवालियापन है। इससे साफ जाहिर होता है कि विपक्ष के नेताओं को शराब के लिए लाइन में लगना गवारा नहीं है और पूर्ण शराबबंदी के लिए नाटक करते नजर आते हैं।

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