ऐसा लग रहा इस मानसून ‘प्रधानमंत्रियों की बारिश’ हो रहीः BJP

मिशन 2019 की तैयारी में जुटी कांग्रेस को बार-बार अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर पेश करने के तुरंत बाद महागठबंधन दलों द्वारा इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल दी और कहा गया कि इसको लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है, सभी विपक्षी दलों के साथ बैठकर इस पर आम सहमति बनाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के नाम पर विपक्षी दलों में सहमति नहीं बनने की स्थिति में पार्टी किसी गैर-कांग्रेसी नेता को भी इस शीर्ष पद के लिए स्वीकार कर सकती है। वहीं कांग्रेस के इस रुख से टीएमसी की ममता बनर्जी, बीएसपी की मायावती, एसपी और राजद जैसे छोटे व क्षेत्रीय दलों को राहत मिल सकती है। हालांकि कहा जा रहा है कि इसका मतलब यह भी नहीं है कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के पिछलग्गू के तौर पर काम करना चाहती है। उसका एक मात्र उद्देश्य मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करना है।

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस की इस रणनीति पर बीजेपी ने तंज कसा है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट किया, 'पहले प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी और अब 'कोई भी', ऐसा लगता है जैसे इस मॉनसून 'प्रधानमंत्रियों की बारिश' हो रही है लेकिन यह मत भूलिए कि PM सिर्फ 2 अक्षरों का शब्द नहीं है। P का मतलब है परफॉर्मेंस, M का मतलब है मेहनत। क्या मुझे अब भी कहने की जरूरत है कि किसे प्रधानमंत्री होना चाहिए या किसे प्रधानमंत्री बरकरार रहना चाहिए?'

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