मिशन साउथ : बीजेपी ने तेज की केरल में सियासी जमीन बनाने की रफ्तार

केरल की धरती इन दिनों लेफ्ट-राइट का राजनीतिक आखड़ा बनी हुई है। राजनीतिक हत्याओं के कीचड़ में बीजेपी कमल खिलाने की जुगत में है। यही वजह है कि इन दिनों में केरल में BJP-RSS कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हत्या के खिलाफ बीजेपी ने जनसुरक्षा यात्रा शुरू किया है। मिशन साउथ के तहत बीजेपी केरल की सियासी जमीन पर उतरकर अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है। इस कड़ी में रविवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी केरल पहुंचकर जनसुरक्षा यात्रा में शामिल हुए। गडकरी ने कहा कि मैं इस बात की भविष्यवाणी करता हूं कि केरल में सीपीएम का सफाया होगा और इसी भूमि पर ये पार्टी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

लेफ्ट पर करारा हमला बोलते हुए गडकरी ने कहा, 'आने वाले चुनावों में इन सबको VRS देकर जनता घर में बैठा देगी, ये काले पत्थर की सफेद लकीर है।' इसके अलावा गडकरी ने केरल के लिए 60 हजार करोड़ रुपये देने की बात कही। लेकिन उन्होंने किन किन परियोजनाओं में खर्च होंगे इसका जिक्र नहीं किया। बीजेपी इस कवायद के जरिए कम से कम अगले विधानसभा चुनाव तक केरल में मुख्य विरोधी दल के रूप में पहचान बनाने की जुगत में है।

दरअसल देश की सत्ता पर विराजमान होने के बाद बीजेपी का सबसे बड़ा लक्ष्य पश्चिम बंगाल और केरल ही हैं। ये राज्य न सिर्फ सियासी रूप से उसके लिए अहम हैं बल्कि वामपंथ से वैचारिक दुश्मनी के चलते भी वो इन राज्यों में अपना आधार खड़ा करना चाहती है। यही वजह है कि बीजेपी ने केरल में पूरी ताकत झोंक दी है।

केरल में वामपंथी पार्टियों का आधार हिंदू मतदाता हैं तो वहीं कांग्रेस का ईसाई और मुस्लिम बेस है। बीजेपी अभी तक केरल में सियासी जगह बनाने में सफल नहीं हो सकी है। लेकिन बदलते माहौल में बीजेपी का ग्राफ देश के कई राज्यों में बढ़ा है, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट केरल में 6.4 फीसदी से बढ़कर 10.45 तक हो गया था। एनडीए का कुल वोट राज्य में 15 फीसदी रहा। 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक सीट भी मिली। इससे वामपंथी गठबंधन में बेचैनी है।

केरल के सामाजिक हालात देश के बाकी हिस्सों से एकदम अलग हैं। केरल में हिंदुओं की आबादी करीब 52 फीसदी है। इसके अलावा 27 फीसदी मुस्लिम और 18 फीसदी ईसाई आबादी है। केरल में मुख्य सियासी मुकाबला लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन के बीच रहता है।

करेल में 2014 के लोकसभा चुनाव में भले ही एक सीट नहीं जीत पाई हो। लेकिन वोट प्रतिशत में जरूर बढ़ोतरी हुई है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केरल में 10.33 फीसदी वोट मिले। केरल की बीस लोकसभा सीटों में से बीजेपी 18 पर चुनाव लड़ी और बाकी 2 सीटों को अपने सहयोगी को दिया। इनमें से एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही और बाकी 17 सीटों पर वो तीसरे स्थान पर रही।

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