नार्थ ईस्ट में 180 सीटों का महादंगल

वर्ष 2017 जहां देश की राजनीति को कई संदेश दे गया, पीएम मोदी का राजनीति में जलवा बना रहा और गुजरात चुनाव में उन्हें अंततः सफलता मिली. पर इस कामयाबी ने उन्हें अपनी रणनीति पर दोबारा से सोचने के लिए मजबूर कर गया. वर्ष 2018 में चुनावों का आगाज फरवरी माह से होने जा रहा है, जहां पूर्वोत्तर के तीन राज्यों की 180 विधानसभा सीटें दांव पर हैं. त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधानसभा चुनाव फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित हैं. जिसके लिए निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह तारीखों की घोषणा कर सकता है.

पूर्वोत्तर के इन तीनों राज्यों में अलग अलग दलों की सरकारें हैं, त्रिपुरा में जहां सत्ता पर पिछले 20 सालों से मणिक सरकार के नेतृत्व वाली मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का कब्जा है, तो नगालैंड में नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के नेतृत्व वाले 'नगालैंड के लोकतांत्रिक गठबंधन' को सत्ता हासिल है. इसके अलावा मेघालय की कमान कांग्रेस के मुकुल संगमा के हाथों में है.

त्रिपुरा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का करीब 10.477 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र साझा करता है. राज्य बांग्लादेश के साथ 839 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा और असम व मिजोरम के साथ क्रमश 53 और 109 किलोमीटर की राष्ट्रीय सीमा साझा करता है. इस राज्य में 1000 फीट से लेकर 3200 फीट तक पहाड़ी श्रेणियां हैं, जिनमें जामपुरी, लोंगतराइ, साकान और बारामुरा शामिल हैं.

हरी पहाड़ियों और सुनहरे रंग के संतरे पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. हाल ही में त्रिपुरा ने केरल (93.91) प्रतिशत को पीछे छोड़कर 94.65 फीसदी साक्षरता दर हासिल की है. राजनीतिक रूप से त्रिपुरा में विधानसभा की 60 सीटें हैं. इसके अलावा राज्य की कुल आबादी 2012 की जनगणना के मुताबिक 36.58 लाख है. आठ जिलों के साथ राज्य में दो लोकसभा सीट है साथ ही यहां की सरकार राज्यसभा में अपना एक प्रतिनिधि भेजती है. क्षेत्रीय राजनीति में भाजपा, कांग्रेस , माकपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रांकपा) मुख्य पार्टियां है जबकि चुनाव में जनता दल (युनाइटेड), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, समाजवादी पार्टी (सपा) जैसे दल अपनी किस्मत आजमाते हैं.

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