अर्जुन मुंडा की नाराजगी भाजपा को पड़ेगी भारी !

मिशन 2019 की तैयारी में जुटी बीजेपी को जहां एक ओर विपक्ष भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक, पत्थलगड़ी, स्थानीय नीति जैसे मुद्दों पर घेर रहा है। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा ने एक बार फिर सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को सोच-समझकर फैसले लेने की जरुरत है। सरकार और संगठन में संवाद की कमी है जिसे जल्द दूर किया जाना जरूरी है। अर्जुन मुंडा ने इससे पहले भी सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए हैं वह कहते रहे हैं कि गलत नीतियों के कारण सरकार और जनता के बीच अविश्वास पैदा होता है।
देखा जाए तो अर्जुन मुंडा ने पत्थलगड़ी मुद्दे पर भी कहा था कि इसको लेकर सरकार को वहां के लोगों से संवाद स्थापित करना चाहिए लेकिन सरकार में अहम पदों पर बैठे लोगों ने न तो अर्जुन मुंडा की बात सुनी और न ही वरिष्ठ बीजेपी नेता और खूंटी सांसद कड़िया मुंडा की। आज पत्थलगड़ी को लेकर सरकार और संगठन विपक्ष के निशाने पर है।
बीजेपी के एक दूसरे वरिष्ठ नेता और मंत्री सरयू राय भी सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कैबिनेट की बैठक में ही कुछ फैसलों को लेकर अपनी आपत्ति जता दी है। वहीं, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। इस पर भी अर्जुन मुंडा ने कहा है कि इसको गंभीरता लेने की जरुरत है। कहा है कि अगर एक कैबिनेट मंत्री अपनी बात नहीं रख सकता तो, ऐसे में सरकार को सोचना चाहिए कि आखिर कमी कहां है।
जानकारों की मानें तो ऐसे समय में जब सरकार और संगठन में दूरी बढ़ती जा रही है, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। राज्य का आदिवासी समाज पार्टी से दूर होता जा रहा है। विपक्ष ने भूमि अधिग्रहण सहित कई मुद्दों पर सरकार को बुरी तरह से घेर रखा है। अपने वरिष्ठ सहयोगियों के सवालों पर गौर नहीं करना बीजेपी को भारी पड़ सकता है।

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