खल रही अर्जुन मुंडा की कमी!

पत्थलगड़ी को लेकर सरकार ने सख्त रवैया अपना रखा है तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों का रुख नरम है। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है सरकार की जन विरोधी नीतियों की वजह से ऐसी समस्याएं पैदा हुई हैं। उधर, सीएम रघुवर दास ने एक बार फिर पत्थलगड़ी समर्थकों को सरकार से संवाद करने को कहा है अन्यथा पुलिसिया कार्रवाई की चेतावनी दी है। कहा है कि सरकार को चुनौती देने वालों को पुलिस पाताल से भी निकाल लेगी।
इऩ सब के बीच सरकार के रवैये को देखते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और खूंटी सांसद कड़िया मुंडा ने भी सरकार की ही खिंचाई की है कहा है कि काफी लंबे अर्से से वह कहते आ रहे हैं कि पत्थलगड़ी के पीछे कुछ स्वार्थी और असामाजिक तत्व हैं जो भोले-भाले ग्रामीणों को भड़का रहे हैं। लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई, अब सरकार को खूंटी में हजारों की संख्या में जवान भेजना पड़ रहा है। सरकार खुद इस समस्या के लिए जिम्मेदार है।
जानकारों की मानें तो इस वक्त अर्जुन मुंडा जैसे मंजे हुए सियासी शख्सियत की जरुरत पार्टी को है। वे सरकार को इस बीच मझधार से निकाल सकते थे लेकिन संगठन और सरकार को उनकी अहमियत की परख नहीं। अर्जुन मुंडा ही एक ऐसे दिग्गज नेता हैं जिनकी जमीनी पैठ खूंटी हो या खरसावां हर जगह है। जो इस इलाके के एक-एक व्यक्ति को पहचानते हैं। उनकी आदिवासी समाज में अपनी अलग छवि है जिसका सदुपयोग पार्टी ऐसे विपरीत वक्त में कर सकती थी लेकिन जानबूझकर पार्टी के एक धड़े ने उन्हें साइडलाइन कर दिया है, उन्हें संगठन से दूर रखने की कोशिश हो रही है। पर ऐसे वक्त में जब सरकार पूरी तरह विपक्ष के हमलों के आगे पस्त होती हुई दिख रही है अर्जुन मुंडा पार्टी को मजबूत स्थिति में खड़ा कर सकते थे।

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