दहेज प्रथा, बाल विवाह पर बीजेपी सांसद ने उठाए सवाल

बिहार में शराबबंदी लागू करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर राज्य में दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ अभियान की शुरुआत की। हालांकि, नीतीश कुमार के इस अभियान पर उन्हीं के सरकार के सहयोगी बीजेपी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर ने सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज प्रथा और बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा बनाए जा रहे कानून का सीपी ठाकुर ने विरोध किया है। बिहार में अगर कहीं भी बाल विवाह या दहेज लेन-देन जैसी घटना होती है तो उस शादी से जुड़े 'बैंड बाजा बारात' सभी को जेल जाना होगा। अब इसके खिलाफ कड़े कानून बनाने की पहल हुई है।

सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कानून में ऐसी शादी से जुड़े सभी लोगों को जेल भेजने का प्रावधान हो सकता है। शादी में वर-वधु पक्ष दोनों के अलावा इससे जुड़े सभी लोगों को कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी शादियों में मदद देने वाले सभी लोगों को कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि सामाजिक कुरीति के खिलाफ तब तक सफलता नहीं मिलेगी जब तक कि पूरे समाज से इस पर सपोर्ट न मिले।

इसके अलावा 12 अक्टूबर को नीतीश कुमार जेडीयू के सभी कार्यकर्ताओं को शपथ दिलाएंगे की वे ऐसी किसी शादी में भाग नहीं लेंगे जिसमें दहेज का लेन-देन हुआ हो या दुल्हन नाबालिग हो। इतना ही नहीं अगर कोई कार्यकर्ता ऐसी शादी में भाग लेने का दोषी पाया जाता है तो उसे तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा।

सीपी ठाकुर ने कहा है कि दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए जो कानून बनाया जा रहा है, उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। ठाकुर ने आशंका जताई कि दहेज प्रथा कानून बनने के बाद ना केवल उसका दुरुपयोग होगा, बल्कि कई निर्दोष लोग भी इसमें फंस सकते हैं। ठाकुर का मानना है कि दहेज कानून का इस्तेमाल दूल्हे और उसके परिवार वालों को बेबुनियाद आरोप लगाकर फंसाने के लिए किया जा सकता है।

बीजेपी सांसद सीपी ठाकुर ने मांग की है कि नीतीश सरकार को दहेज प्रथा के खिलाफ बनाए जा रहे कानून पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए और इसके प्रावधानों लेकर समीक्षा करनी चाहिए ताकि इसका दुरुपयोग ना हो।

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