हद कर दी बीजेपी एमपी ने? कार्यकर्ता से पैर धुलवाकर पिलाया

बीजेपी के गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर विवादों में घिरते दिख रहे हैं। सांसद का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें पार्टी का एक कार्यकर्ता उनका पैर धोकर पानी पीता दिख रहा है इस वीडियो और तस्वीर को लेकर वे खूब ट्रोल हुए। सबसे बड़ी बात ये है कि खुद सांसद ने ही यह तस्वीर अपने फेसबुक पर लगाई थी। वहीं, इस विवाद के बाद बीजेपी सांसद ने इसमें कुछ भी गलत न बताते हुए कहा कि मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आज मैंने अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूँ ,भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की ख़ुशी में हज़ारों के...

Posted by Dr Nishikant Dubey on Sunday, September 16, 2018

अपनो में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ?उन्होंने जनता के...

Posted by Dr Nishikant Dubey on Sunday, September 16, 2018

बता दें कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे गत रविववार को कनभारा पुल के शिलान्यास समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ता पंकज शाह ने कहा कि सांसद ने पुल का तोहफा देकर जनता पर बहुत उपकार किया है। इस नाते कसम के मुताबिक उनके चरण धोकर पीने का मन कर रहा है। फिर कार्यकर्ता ने थाली और पानी मंगाकर सांसद का पैर धोना शुरू कर दिया। सांसद निशिकांत दुबे ने भी बिना किसी एतराज के पैर धोने के लिए आगे बढ़ा दिया। इतना ही नहीं कार्यकर्ता ने पैर धोने के बाद पानी भी पी लिया।

इस वाकये की तस्वीर खुद सांसद ने अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट करते हुए लिखा, आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूं। भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की ख़ुशी में हज़ारों के सामने पैर धोया। उन्होंने आगे लिखा है कि काश यह मौक़ा मुझे एक दिन माता पिता के बाद मिले, मैं भी कार्यकर्ता ख़ासकर पवन जी का चरणामृत पियूं जय भाजपा जय भारत। कार्यकर्ता से पैर धुलवाने के इस मामले में लोगों ने सांसद को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया।

जब कार्यकर्ता से पैर धुलवाने की तस्वीर पर विवाद मचा तो बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने फेसबुक पर सफाई दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, अपनों में श्रेष्ठता बांटी नहीं जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ? उन्होंने जनता के सामने क़सम खाया था,उनको ठेस ना पहुंचे सम्मान किये, पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है, सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएं क्या यह नहीं करती हैं? इसे राजनीतिक रंग क्यूं दे रहे हैं। पैर अतिथि का धोना गलत है, अपने पुरखों से पूछिए ,महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया था? लानत है घटिया मानसिकता पर।

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