नार्थ ईस्ट के 8 में से 4 राज्य में भाजपा क्यों !

पूर्वोत्तर के 8 में से 4 राज्य में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराकर भाजपा ने कई राजनीतिक मिथक तोड़े हैं. त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि त्रिपुरा में कमल खिल ही चुका है. नगालैंड में भी वो गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश करेगा. अरुणाचल, असम, मणिपुर के बाद अब त्रिपुरा में भी बीजेपी की सरकार का रास्ता जिस तरह साफ़ हुआ है, वह बीजेपी के लिए अवश्य ऐतिहासिक है लेकिन वाम दल और कांग्रेस के इस तरह सिमट जाने का भी घर असर आनेवाले दिनों में भारतीय राजनीति पर पड़ेगा. इस तरह नॉर्थ ईस्ट के 8 में से 4 राज्यों में बीजेपी सत्ता में आ गई है. वहीं मेघालय और नगालैंड में भी बीजेपी सरकार बनाने में बड़ा रोल प्ले कर सकती है. सिक्किम में भी बीजेपी सत्ताधारी एसडीएफ की सहयोगी है. सिर्फ मिजोरम में बीजेपी सत्ता से बाहर है. यहां भी इसी साल चुनाव होने हैं, और भाजपा की पूरी कोशिश होगी कि मिजोरम पर भी भगवा रंग चढ़ा दिया जाये. इस तरह से भारत का लाल–हरा पूरब भी केसरिया आसमान से लिपटा दिखेगा.

सवाल यह है कि आखिर भाजपा को जीत कैसे मिली और अन्य स्थापित दल कैसे मुंह की खा गए! भाजपा के जीत की कहानी उसके संगठन के ताकत को खड़ी करने से जुडी है. एक एक बूथ को लेकर भाजपा ने विजय की रणनीति बनाई. इसे आप एक उदाहरण से समझिये...त्रिपुरा और नगालैंड की हिन्दू आबादी का एक बड़ा हिस्सा नाथ सम्प्रदाय को मानता है. योगी आदित्यनाथ उनके धर्मगुरु हैं. भाजपा ने इसे दृष्टि में रखते हुए योगी आदित्यनाथ को उनके प्रभाव वाले इलाकों में भेजा. नतीजा अच्छा आया. ऐसे ही एक-एक सीट को जीतने की तैयारी भाजपा ने की थी.

दूसरी तरफ कांग्रेस ने तो जैसे चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान ली थी. नगालैंड में उसके कई उम्मीदवार आर्थिक तंगी का रोना रोते हुए मैदान से बाहर हो गए. पार्टी सबकुछ देखती रही. वाम दल मानिक सरकार की व्यक्तिगत इमानदारी पर ही आत्ममुग्ध रहे. जैसे पश्चिम बंगाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य भी बेहद ईमानदार थे. रिजल्ट क्या हुआ! आज की राजनीति धन पोषित हो गयी है. जीत के लिए लड़ाई हो रही है. अगर आपके कार्यकर्ता संसाधनविहीन हैं तो आप केवल अपनी छवि के सहारे जीत नहीं सकते. ऐसे सवाल लोकतंत्र को कमजोर भले ही करते हैं, पर राजनीति की सच्चाई यही है. भाजपा इस सच के साथ चलती है जबकि अन्य दल आदर्श के खोखले घरों में बैठकर हवाई क्रांति करते हैं. यह चुनाव राजनीतिक मुल्यांकन का वक़्त सबको दे रहा है.

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