शिवसेना को लेकर भाजपा की दुविधा!

महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ तालमेल बनाये रखने या गठबंधन तोड़ने के मामले में भाजपा दुविधा में है। लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनाव और मुंबई महानगरपालिका, बीएमसी के चुनाव में भाजपा को मिली सफलता के आंकड़ों के आधार पर पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि तालमेल तोड़ कर भाजपा अकेले लड़े। दूसरी ओर कई नेता ऐसे हैं, जो मान रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में इसका नुकसान हो सकता है।
भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का फोकस अब लोकसभा चुनाव पर है। सो, उसमें कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता है। 2014 में लोकसभा का चुनाव भाजपा और शिवसेना ने मिल कर लड़ा था। राज्य की 48 में से 24 सीटों पर भाजपा लड़ी थी और 23 सीटें जीती थी। शिवसेना 20 सीटों पर लड़ी थी और 18 जीती थी। इससे पहले 2009 के चुनाव में भाजपा की नौ और शिवसेना की 11 सीटें थीं।

भाजपा को हर हाल में अपनी 23 सीटें बचानी हैं। 2019 में 24 सीटें लड़ कर उसमें से 23 जीतना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। इसलिए कई नेता चाहते हैं कि भाजपा अकेले लड़े। वह रामदास अठावले और कुछ दूसरे छोटे सहयोगियों के साथ तालमेल करके 40 से ज्यादा सीटों पर लड़े तो 23 या उससे ज्यादा सीटें जीती जा सकती हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि शिवसेना ने पिछले 10 साल में अपना वोट कमोबेश बनाए रखा है। उसने 2009 में भी 11 सीटें जीती थीं। सो, उसकी चुनौती बड़ी होगी। और अगर कांग्रेस व एनसीपी ने तालमेल कर लिया तो भाजपा 2009 की तरह चौथे नंबर की पार्टी भी हो सकती है। तभी भाजपा के कई नेता एनसीपी के साथ तालमेल की वकालत कर रहे हैं।

शिवसेना से तालमेल तोड़ने की वकालत करने वालों का तर्क है कि लोकसभा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले लड़ी और उसने 122 सीटें जीतीं। इससे पहले 2007 और 2012 में उसने क्रमशः 54 और 56 सीटें जीती थीं। यानी अकेले लड़ी तो दोगुने से ज्यादा सीटें मिलीं। इसी तरह बीएमसी भाजपा ने अकेले लड़ कर 82 सीटें जीतीं। इससे पहले 2007 और 2012 में उसने क्रमशः 28 और 31 सीटें जीती थीं। यहां भी पार्टी अकेले लड़ कर दोगुने से ज्यादा सीट जीती। लेकिन विधानसभा और बीएमसी के नतीजों के आधार पर भाजपा अकेले लड़ने का जोखिम लेने में हिचक रही है। लोकसभा जीत गए तब तो विधानसभा और निगम में जोखिम लिया जा सकता है, पर लोकसभा में जोखिम लेना आसान नहीं है। तभी शिवसेना के साथ तालमेल को लेकर दुविधा है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *