मिशन 2019: सियासी गणित पर माथापच्ची

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को पार्टी की बिहार इकाई के कोर ग्रुप के नेताओं के साथ बैठक की। जदयू के साथ गठजोड़ कर नीतीश कुमार सरकार में शामिल होने के बाद यह बीजेपी की पहली बैठक थी। सूत्रों के मुताबिक 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की नजर बिहार में 22-25 सीटों पर है। जातीय समीकरणों की सियासत में आरजेडी-कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी का गठबंधन मजबूत है लेकिन सीटों के बंटवारे की चुनौती उलझने पैदा कर रही है। उलझनों को साधने के कुछ फॉर्मूलों पर विचार मंथन भी शुरू हो गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेडीयू और बीजेपी के बीच 2009 लोकसभा चुनाव के बंटवारे का फॉर्मूला अब 2019 में ठीक उल्टा हो जाएगा। 2009 में जेडीयू ने 25 और बीजेपी ने 15 सीटें लड़ी थी। ऐसा माना जा रहा है कि अब जेडीयू को कम सीटों पर संतोष करना होगा। जेडीयू के खाते में 9-12 सीटें, लोजपा के खाते में 4, रालोसपा को 2 सीटें बांटने को लेकर मंथन कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक रालोसपा के जहानाबाद सांसद अरूण कुमार 2019 में बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ने की जुगत भिड़ा रहे हैं। वहीं, लोजपा के वैशाली सांसद रामाकिशोर सिंह और खगड़िया सांसद महबूब अली कैसर का पार्टी से मोहभंग हो चुका है और नए आशियाने की तालाश में हैं। ऐसे में बीजेपी 23-25 सीटों पर लड़ने का प्रस्ताव सहयोगियों के सामने लाएगी।

उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जीतन राम मांझी को हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के बीजेपी में विलय का ऑफर दे चुके हैं। जीतन राम मांझी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से अपने बेटे संतोष मांझी को एमएलसी बना कर बिहार के मंत्रिपरिषद् में शामिल करने की गुहार भी लगा चुके हैं।

मांझी की मांगों को पूरा करने के लिए अमित शाह सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं। 2019 लोकसभा के करीब होने पर अमित शाह कोई दांव खेल सकते हैं जिससे मांझी को साधा जा सके। जीतन राम मांझी को गवर्नर बनाने की रणनीति पर भी अमित शाह विचार कर रहे हैं।

अक्टूबर के अंत या फिर नवंबर के शुरू में अमित शाह बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर होंगे तो विभिन्न वर्गो की कई बैठकें कर संगठन में जान फूंकने की कोशिश करेंगे। जातीय समीकरण की सियासत को देखते हुए भाजपा के हर मोर्चे को हर महीने कड़े टास्क सौंपा जाएगा। बूथ स्तर पर संगठन मजबूत कर सहयोगियों के साथ लोकसभा और विधान सभा चुनाव के लिए सीटों का फॉर्मूला तैयार किया जाएगा।
बता दें कि भाजपा ने 2014 के आम चुनाव में बिहार में 22 सीटें जीती थीं और उसके सहयोगियों ने नौ सीटें। उसी चुनाव में जदयू 40 में से महज दो सीटें ही जीत पाया था।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *