बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है मुख्य मुकाबला!

राज्य के 34 नगर निकायों में 16 अप्रैल को चुनाव हो रहा है। वहीं रामगढ़ नगर परिषद का चुनाव पहली बार होने जा रहा है। रामगढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष और 32 वार्ड का चुनाव होने वाला है। जिसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। चुनाव प्रचार आज शाम थम जाएगा। इसको देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी। इसी बीच कई दलों के बड़े नेताओं का भी रामगढ़ में दौरा हुआ।

चुनाव को लेकर केंद्रीय मंत्री और राज्य के मंत्री, विधायक और बड़े नेता लगे हुए हैं। रामगढ़ नगर परिषद का पहली बार हो रहा चुनाव काफी रोचक और रोमांचक माना जा रहा है। देखा जाय तो नगर परिषद क्षेत्र रामगढ़ शहर से सटा हुआ है। इसलिए यहां क्षेत्रीय पार्टियों से ज्यादा राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति मजबूत दिख रही है। रामगढ़ नगर परिषद का जातीय और सामाजिक समीकरण को देखते हुए राष्ट्रीय पार्टियों को ही मजबूत माना जा रहा है।

वैसे क्षेत्रीय पार्टियां भी अपने को रेस में बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की है। अब जबकि दो दिनों के बाद चुनाव होने वाले हैं, स्थिति बहुत स्पष्ट नजर आने लगी है। हालांकि, मतदाताओं ने चुप्पी साध ली है। लेकिन अभी तक के माहौल को देखें तो बीजेपी, कांग्रेस, झामुमो और आजसू इस चुनावी रेस में आगे चल रहे हैं। नगर परिषद क्षेत्र का जातीय एवं सामाजिक समीकरण ऐसा है कि यहां राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी और कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिख रही है। इस क्षेत्र से अध्यक्ष पद के मजबूत प्रत्याशी के रूप में दिनेश मुंडा, आनंद बेदिया, जगनारायण बेदिया और योगेश बेदिया आगे दिख रहे हैं।

जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए रंजीत पांडे, मुकेश यादव, मनोज महतो मजबूत प्रत्याशी दिख रहे हैं। रामगढ़ नगर परिषद क्षेत्र में बाहरी लोगों की अच्छी खासी आबादी है। साथ ही सवर्ण जातियों का वोट भी काफी है, वैश्य समाज का वोट भी काफी है। जिसको देखते हुए बीजेपी प्रत्याशी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। बीजेपी की टीम भी खास रणनीति के तहत काम कर रही है। बीजेपी के कई बड़े नेता चुनाव अभियान से जुड़े हुए हैं। वहीं कांग्रेस की स्थिति भी अच्छी दिख रही है। नगर परिषद क्षेत्र में दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यकों की अच्छी खासी आबादी है।

जानकारों की मानें तो कांग्रेस को पिछड़ों के वोट मिल रहे हैं। वहीं बाहरी मतदाता भी कांग्रेस को मतदान करेंगे ऐसी संभावना जतायी जा रही है। जिससे लगता है कि कांग्रेस भी मुकाबले में मजबूत स्थिति में बनी हुई है। वहीं कांग्रेस के नेता भी रणनीति बनाकर बड़े नेताओं के निर्देशानुसार काम कर रहे हैं। कांग्रेस को पूर्व विधायक अर्जुन राम महतो एवं जिला परिषद सदस्य ममता देवी के जुड़ने से काफी फायदा होता नजर आ रहा है। बीजेपी और कांग्रेस का जनसंपर्क अभियान और प्रचार-प्रसार भी काफी सुनियोजित तरीके से चल रहा है। वहीं क्षेत्र में खास पकड़ रखने वाली आजसू भी रेस में नजर आ रही है। हालांकि आजसू के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी बिल्कुल नए हैं। उनकी पहचान उतनी नहीं है। लेकिन आजसू के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी मनोज महतो रेस में बने हुए हैं। वह पिछले कुछ वर्षों से नगर परिषद क्षेत्र में अपने को स्थापित किए हुए हैं। जिसका लाभ उन्हें मिलता नजर आ रहा है। वहीं झामुमो के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शिवकुमार करमाली एक पढ़े-लिखे तेज तर्रार युवा नेता माने जाते हैं। उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अरुण कुमार कुशवाहा की भी एक अलग पहचान है। समाज के लोग अरुण कुशवाहा के लिए जी जान से काम कर रहे हैं।

लेकिन जानकारों का कहना है कि झामुमो की टीम संगठित होकर काम नहीं कर रही है इस कारण पार्टी प्रत्याशी बहुत आगे नहीं चल पा रहे हैं। हालांकि झामुमो की ओर से मांडू विधायक जेपी पटेल और गोमिया के पूर्व विधायक योगेंद्र महतो ने कई स्थानों पर जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं से पार्टी प्रत्याशी के लिए वोट मांगा है।

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