2019 में बिहार में दोनों चुनाव साथ-साथ

सोमवार को बिहार में भी चुनावी बयार तेज़ बही. अपने जन संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ़ कर दिया कि 2019 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ कराए जायेंगे. नीतीश कुमार का यह बयां एकबारगी प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ा गया. इशारा साफ़ है कि 15 महीने बाद कभी भी चुनाव के लिए तैयार रहें. यह मेसेज संगठन और सरकार दोनों के लिए है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अब लोक लुभावन वायदों की बरसात होगी. सरकार हर वो कर्मकांड करेगी जिससे चुनाव जीता जा सके. हर विसात बिछेगी, हर सियासी मोहरे का इस्तेमाल होगा. हर दल के वोटबाज़ तोड़ें जायेंगे. दलों का दलदल बनेगा. जो नहीं मानेंगे, उन्हें डराने की कोशिशें होंगी.

भाजपा और जेडीयू का गठबंधन वोटरों को लालू के भ्रष्टाचार से डराएगा. कांग्रेस की कदाचार कथाएं बतायेगा. वहीं लालू नीतीश के विश्वासघात और भाजपा के अहंकार के पर्चे बांटेगा. इस बीच एक बड़ा फैक्टर उपेन्द्र कुशवाहा का होगा, अगर वो राजग खेमे से बाहर आये तो लालू और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश की कब्र ही खोदेंगे.

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