बिहार : जमुई सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना

बिहार में एक ऐसी कोठी है जिसका बिहार की राजनीति में खासा दबदबा रहा है. जमुई और बांका जिले की सियासत में तीन दशक तक गिद्धौर की लाल कोठी ने राज किया है. अब इसी कोठी की राजनीतिक उत्तराधिकारी श्रेयसी सिंह की वजह से लाल कोठी फिर सुर्खियों में है. श्रेयसी सिंह जमुई सीट पर भाजपा की प्रत्याशी हैं. उनके पिता दिवंगत दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और पिता के निधन के बाद मां पुतुल देवी भी दो बार सांसद रह चुकी हैं. एक बार तो वह निर्दलीय लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं.श्रेयसी सिंह का मुकाबला महागठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव के छोटे भाई विजय प्रकाश से है. वहीं पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे अजय प्रताप सिंह भी मैदान में हैं. इस वजह से यहां संघर्ष त्रिकोणीय है.

श्रेयसी सिंह के पिता दिग्विजय सिंह की नीतीश कुमार से पटती नहीं थी. वो सार्वजनिक तौर पर भी उनकी आलोचना कई बार कर चुके थे. गिद्धौर राजवंश के इस उत्तराधिकारी ने राजनीति में नई पहचान बनाई थी. वो समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के काफी करीब थे. 55 साल की उम्र में ही ब्रेन हेमरेज की वजह से उनका निधन हो गया था. वो पांच बार सांसद रह चुके थे. 1990 में ही वह राज्यसभा पहुंच गए थे.लाल कोठी के राजा दिग्विजय सिंह को लोग दादा कहकर पुकारते थे. जब उनका निधन हुआ तो उनकी पत्नी बांका से दो बार सांसद चुनी गईं. अब लाल कोठी की राजनीतिक विरासत उनकी बेटी और अंतरराष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह के कंधों पर है. लाल कोठी के भाजपा से रिश्ते अचेछे रहे हैं. यही वजह है जह पिछले महीने पुतुल सिंह ने लाल कोठी में जब करीब एक हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और कहा कि इस कोठी का जिम्मा अब उनके कंधों पर है तो फौरन कुछ दिनों बाद श्रेयसी सिंह को भाजपा में शामिल करा लिया गया. अब वो यहां से भाजपा की उम्मीदवार हैं.

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