शिक्षा के फ्रंट पर बिहार पिछड़ गया है : उपेन्द्र कुशवाहा

-37 सालों में शिक्षा व्यवस्था में आयी गिरावट को ठीक करने के लिए 37 महीने का समय

-शिक्षा में गिरावट की जवाबदेही सिर्फ सरकार की नहीं

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था में आयी कथित गिरावट के लिए एक के बाद एक आयी सरकारों को दोषी ठहराते हुए प्रदेश की वर्तमान नीतीश कुमार सरकार को इसमें सुधार के लिए 37 महीने का समय दिया है। पटना के गांधी मैदान में अपनी पार्टी द्वारा आयोजित "शिक्षा सुधार संकल्प महासम्मेलन" को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिनकी सोच है कि शिक्षा के बिना विकास का कोई मतलब नहीं। उपेंद्र कुशवाहा ने स्वीकारा है कि शिक्षा के फ्रंट पर यह प्रदेश पिछड़ गया है, हम आशा करते हैं कि शिक्षा क्षेत्र में स्थिति बदलेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 37 सालों में शिक्षा व्यवस्था में आयी गिरावट को ठीक करने के लिए हमलोग 37 महीने का समय देते हैं।

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा, "शिक्षा में सुधार की जवाबदेही केवल सरकार की नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को भी आगे आना होगा, तभी शिक्षा में सुधार होगा। राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण 1972 से लगातार शिक्षा में गिरावट आई है। 1980 के बाद इसमें सबसे ज्यादा गिरावट आई है। अब वक्त नहीं है। 2-3 पीढ़ियां पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। अब 37 साल के इस गिरावट को 37 महीने में पूरा करना होगा। एनडीए की सरकार शिक्षा में सुधार का काम कर रही है। अब बिहार में भी एनडीए की सरकार है। दोनों को मिलकर शिक्षा में आई इस गिरावट को दूर करने की जरूरत है।"
उन्होंने प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी जदयू को उसे रालोसपा द्वारा उसके सामाजिक अभियान शराबबंदी और दहेज प्रथा में अपनी पार्टी द्वारा समर्थन दिए जाने की याद दिलाते हुए कहा कि उनकी पार्टी द्वारा आयोजित इस महासम्मेलन का राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।

उन्होंने राज्य सरकार की वित्त रहित शिक्षा नीति और डिग्री के आधार पर शिक्षकों की बहाली तथा एक स्कूल में शिक्षकों को दो तरह का वेतन सहित अन्य नीतियों को प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में आयी गिरावट के लिए जिम्मेवार बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कई कदम उठाए जाने की आवश्यक्ता जतायी। उन्होंने मध्याहन भोजन के दायित्व से शिक्षकों को मुक्त किए जाने जरूरत बताते हुए शिक्षकों को केवल पठन—पाठन का दायित्व सौंपे जाने की आवश्यकता जतायी। मंत्री ने फिर दोहराया की सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को मार्च 2019 के अंत तक प्रशिक्षण दे दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "निजी स्कूल मनमानी करते हैं। सरकारी या निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएं, ये अच्छी और सस्ती होती हैं। लेकिन निजी स्कूल वाले अपने फायदे के लिए दुसरी पुस्तकें पढ़ाते हैं। राज्य सरकारों को इस पर ध्यान देना होगा। स्कूल आनलाइन ऑर्डर कर एनसीआरटी की किताबें मंगा सकते हैं।"

आपको बता दें कि शिक्षा में सुधार को लेकर केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने पटना में एक रैली की थी। पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस रैली को नाम दिया शिक्षा सुधार संकल्प महासम्मेलन। उपेन्द्र कुशवाहा खुद केन्द्र में शिक्षा राज्यमंत्री हैं, लेकिन बिहार में आई शिक्षा में गिरावट को लेकर उन्हें रैली का आयोजन करना पड़ रहा है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *