शर्मसार है बिहार

-बिहार की राजनीति के राजनेता बाहर तो एक दूसरे को गालियां दे ही रहे थे अब सदन के अंदर भी सत्ता विपक्ष के माननीय सदस्य मां बहन की गालियां दे रहे हैं.

यह कैसा नजारा है! यह कैसी राजनीति है! यह नेता जनता के वोट पर जीतकर तो आते हैं, लेकिन इन्होंने सियासत को इस स्तर पर पहुंचा दिया है कि राजनीति को भी शर्म आने लगी है. बिहार के 10 करोड़ लोगों ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में हुए तमाशे को देखा.

बालू के सवाल पर जदयू के विधायक वीरेंद्र कुमार और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच शुरू हुई बहस देखते-देखते गाली-गलौज में बदल गई. सदन के ऐतिहासिक पटल पर मां बहन की गाली तक दी गई. अगर कुछ लोगों ने बीच-बचाव नहीं किया होता तो ये माननीय विधायक मारपीट तक कर बैठते.

बालू पर पूरा बिहार तबाह है. हाईकोर्ट के इंटरवेंशन के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है, तब तक पुराने हिसाब से बालू की सप्लाई होती रहेगी. सरकार की इसी हठधर्मिता के विरोध में राजद विधायक ने सवाल उठाया था. बालू किसी राजनीतिक दल का सवाल नहीं है. बालू किसी खास दल की संपत्ति भी नहीं है. बालू के कृत्रिम संकट की वजह से बिहार के लाखों घर बन नहीं पा रहे. ऐसे में इस गंभीर मसले पर सदन के अंदर गहन चर्चा होनी थी. खुद भाजपा के विधायक सरकार के सामने बालू संकट से उत्पन्न हुई अराजकता का सवाल उठा रहे थे. ऐसे में दो विधायक व्यक्तिगत तौर पर भिड़ जाएं, यह तो शर्मनाक है, दरअसल दोनों ही विधायक अपने अपने नेता के सामने अपने बाहुबल और दमखम को दिखाना चाहते थे.

न्यूसेंस आज की राजनीति का केंद्रीय तत्व बन गया है. अगर आप न्यूसेंस करते हैं, बोलते हैं तो आप के नेता की नजर आप पर जल्दी पड़ेगी, यह सोच राजनीतिक विकृति को बढ़ावा दे रही है. मूल्यों और मसलों की समझ की जगह पर हाराकिरी की राजनीति हो रही है. आखिर किस काम के होंगे यह हिरावल दस्ता! जब राजनीति में सुचिता ही नहीं बचेगी. जब सदन के अंदर जाने से खुद विधायक ही डरने लगेंगे तो किस किस्म का सिस्टम बनेगा! इस पर विचार करने की जरूरत है. कम से कम अपने लिए ना सही, बिहार के 10 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए तो सदन को बख्श दीजिए.

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