बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून में किए कई बदलाव

बिहार में शराबबंदी को लेकर सरकार काफी लंबे समय से विपक्ष के निशाने पर थी। विपक्ष का आरोप था कि इसके कारण समाज के कमजोर लोगों पर ज्यादती हो रही है। दलितों और मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। अब सरकार ने इस पर नरमी बरतते हुए शराबबंदी कानून में आज कई बड़े बदलाव कर दिए हैं।

हालांकि जब बिहार सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू किया था तो हर तरफ सरकार के इस कदम की काफी तारीफ हुई थी। वहीं शराबबंदी लागू होने के बाद भी गैरकानूनी रूप से शराब की तस्करी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

शराबबंदी कानून में जो संशोधन हुआ है उसमें सजा को लेकर नरमी बरती गई है। घर, वाहन और खेत से शराब जब्ती होने पर नरमी दिखाई जाएगी। पहली बार शराब पीते हुए पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना या फिर तीन महीने जेल का प्रावधान किया जाएगा। वहीं, सामूहिक जुर्माना समाप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

इसके अलावा जहरीली शराब से मृत्यु होने पर सख्त कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसमें सजा-ए-मौत का प्रावधान हो सकता है। सरकार पहले से ही शराबबंदी कानून में बदलाव के लिए कानूनविदों से सलाह करने का काम कर रही थी।

बिहार विधानसभा में शराबबंदी संसोधन विधेयक पेश करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि अनुभव के आधार पर शराबबंदी कानून में बदलाव किए गए हैं। इसके लिए लीगल राय भी ली गई। नीतीश कुमार ने कहा कि राय के आधार पर संशोधन की जरुरत महसूस हुई। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सिर्फ कानून से काम नहीं हो सकता है। इस दौरान नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए विपक्ष पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों सुधार की बात को भी पसंद नहीं करते हैं। कुछ लोगों को आप नहीं बदल सकते हैं।

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