बिखरने ही वाली है बिहार कांग्रेस

-सोनिया और राहुल की धमकी बेअसर
-मंत्री बनने के लिए सदानंद बनेंगे टूट के सूत्रधार

सोनिया और राहुल गांधी के समझाने पर भी सत्ता के भूखे कुछ कांग्रेसी विधायक बिहार में पार्टी को तोड़ने पर आमादा हैं। जेडीयू नेता अपने संख्या गणित ठीक करने और लालू के मजबूत गठबंधन को कमजोर करने के लिए कांग्रेस के कुछ विधायकों से लगातार संपर्क में है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सदानंद सिंह विक्षुब्ध गुट की अगुवाई कर रहे हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस के रणनीतिकार अगर यूं ही निष्क्रिय रहे तो बिहार कांग्रस में टूट तय है।

शायद ही ऐसा कोई राज्य बचा हो, जहां कांग्रेस लगातार कमजोर होने के बावजूद आपसी कलह और गुटबाजी से न उलझ रही हो। जहां एक ओर हिमाचल में अंदरूनी कलह चल रही है, वहीं बिहार कांग्रेस सत्ता से अलग होने के बाद कई कांग्रेसी विधायकों के मन में सत्ता सुख की लालसा जोर मार रही है। बिहार में महागठबंधन टूटने से जहां जेडीयू में दोफाड़ की स्थिति बन गई है, वहीं खुद जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार कांग्रेस में तोड़फोड़ मचाने की कोशिश में हैं। कहा जा रहा है कि नीतीश कांग्रेस के कुछ विधायकों को अपनी ओर खींचने में जुटे हैं।

बिहार में कांग्रेस बीस साल के बाद 2015 में सत्ता में लौटी थी। वह सूबे की सत्ता के सिंहासन पर भले ही काबिज न रही हो, लेकिन सत्ता में साझीदार जरूर रही है। ऐसे में कांग्रेसी विधायकों को दो दशक के बाद सत्ता सुख भोगने का मौका मिला था। लेकिन नीतीश के बीजेपी से हाथ मिला लेने के बाद सत्ता सुख से कांग्रेसी विधायक महरूम हो गए हैं।

सूत्रों की माने तो नीतीश कुमार ने 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के टिकट बांटने के साथ-साथ कांग्रेस के टिकट में हस्तक्षेप किया था। उन्होंने अपने एक दर्जन चहेतों को कांग्रेस पार्टी से टिकट दिलाया था। उनमें से कई विधायक जीतने में कामयाब भी हुई थे। मौजूदा बदले हुए समीकरण में नीतीश कुमार अपने आप को और मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं। ऐसे में उनके निशाने पर वह कांग्रेसी MLA में हैं जिनको 2015 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट दिलाने में अहम भूमिका अदा की थी। कांग्रेस के करीब 10 विधायक हैं, जो बकायदा नीतीश कुमार से संपर्क में हैं।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस के ज्यादातर सवर्ण विधायक बीजेपी में जाना चाहते हैं, तो वहीं अति पिछड़े और महादलित समुदाय के कई विधायकों का रूझान जदयू की तरफ झुकता नजर आ रहा है। दरअसल कांग्रेसी विधायकों की टूट की एक वजह और भी है। कांग्रेस के MLA को आरजेडी का संग रास नहीं आ रहा है। चाहे वो विचारधारा का मामला हो या क्षेत्र में वोटों का हिसाब किताब। राज्य में कांग्रेस के 27 विधायक हैं, ऐसे में जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में अगर पार्टी टूटती है, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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