बिहार कांग्रेस, जायें तो जायें कहां!

-महागठबंधन में टूट के बाद से कांग्रेस में उहापोह की स्थिति

बिहार में जब से महागठबंधन की सरकार टूटी है तब से राजनीति में भूचाल आ गया है। इस दौरान यदि सब से ज्यादा किसी पार्टी को नुकसान हुआ है तो वो है कांग्रेस। महागठबंधन में टूट के बाद से कांग्रेस में उहापोह की स्थिति हो गयी है। पद चले जाने से कांग्रेस विधायक नाराज दिखाई दे रहे हैं। उसे आरजेडी के साथ दोस्ती की कुर्बानी सत्ता गवांकर देनी पड़ी। लेकिन अभी भी यह तय नहीं है कि कांग्रेस की बिहार में क्या भूमिका होगी। कांग्रेस नेताओं की सबसे ज्यादा नाराजगी पार्टी आलाकमान की चुप्पी को लेकर भी है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी टूटती है तो इसमें कोई भी नई बात नहीं होगी...

जो दल ये उम्मीरद लगाकर बैठे थे कि नीतीश कुमार के महागठबंधन तोड़ने और बीजेपी के साथ सरकार बनाने के फैसले से जेडीयू में फूट पड़ सकती है। आज उन्हीं दलों में दरार पड़ती हुई नजर आ रही है। बिहार में कांग्रेस के कुल 27 विधायक हैं। दरसअल, महागठबंधन की सरकार में इन लोगों की खूब चलती थी। लेकिन, अब जेडीयू और बीजेपी की सरकार बनने के बाद इन्हेंो पूछने वाला कोई नहीं है। आज बिहार कांग्रेस के विधायकों की सत्ता् में कोई भूमिका नहीं है ऐसे में उनके पास फिलहाल आरजेडी के साथ रहने के अलावा कोई दूसरा रास्तास भी नहीं है। मजबूरी में ये लोग लालू यादव के साथ हैं। लेकिन, अब पार्टी में बगावत बढ़ती जा रही है। हालांकि बिहार कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है कोई विधायक बागी नहीं हुआ है।

कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि यहां पर धर्मनिरपेक्ष दल एकजुट हैं। लेकिन, सूत्र लगातार ये दावा कर रहे हैं कि नौ विधायक तो बागी हो ही गए हैं और आने वाले वक्त में कुछ और विधायक भी टूटकर जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। इन लोगों का मानना है कि ये सारा खेल लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वीं यादव ने बिगाड़ा है। अगर ये लोग अपनी जिद पर ना अड़ते और तेजस्वीं का इस्तीबफा हो जाता तो सब ठीक हो जाता। ये विधायक भी मानते हैं कि आखिर कैसे इतने लंबे समय तक किसी के भ्रष्टाीचार को बर्दास्त किया जा सकता है। बहरहाल, हकीकत ये है कि कांग्रेस पार्टी की बेचैनियां बढ़ गई हैं।

बिहार में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि आरजेडी नेताओं की हताशा बढ़ती जा रही है। हालांकि आरजेडी के नेता खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक पंडि़तों का मानना है कि कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी में धीरे-धीरे बगावत बढ़ रही है। यानी बिहार में विपक्ष के भीतर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस और आरजेडी के असंतुष्टी नेताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वो करें तो करें क्या? भ्रष्टाचार का आरोप झेल रही आरजेडी के साथ वह अपनी नैया कैसे पार लगाएंगे। बिहार की सत्ता से हाथ धोने के बाद इन्हीं शिकायतों की वजह से कांग्रेस नेता अब विकल्प की तलाश में जुट गए हैं।

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