बिहार : कांग्रेस और लोजपा एकला चलो का फंडा अपना सकती है !

बिहार में चुनावी बिगुल बजने के बाद भी अबतक एनडीए और महागठबंधन में सीट बंटवारे पर मामला फंसा हुआ है.एनडीए से जहां लोजपा अलग होकर एकला चलो का मन बना रही है,वहीं कांग्रेस भी राजद से सीटों में तालमेल नहीं होने की स्थिति में अकेला चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है.महागठबंधन से तेजस्वी ने रालोसपा और वीआईपी को किनारा कर दिया है.वहीँ हम ने तो पहले ही एनडीए में शामिल होने का मन बन लिया है.यानी कि बिहार की पॉलिटिकल पार्टी में इन और आउट का खेल चल रहा है.देखा जाए तो एनडीए में अभी तक सीट बंटवारे पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है. इसका मुख्य कारण लोजपा की बगावती तेवर को माना जा रहा है. लोजपा 43 सीटें मांग रही है, जबकि उसे ज्यादा से ज्यादा 20 सीटें देने की बात हो रही है. इससे लोजपा नाराज चल रही है. उधर भाजपा ने जदयू पर सीट बंटवारे को लेकर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि जदयू ने 127 और 120 सीटों का फार्मूला लाया है. भाजपा 123 सीटें लेकर 20 लोजपा को दें और खुद 103 सीटें पर चुनाव लड़े. भाजपा जदयू के फार्मूले पर 128 और 115 का फार्मूला दिया है. भाजपा 128 सीटें देती है तो उसके पास खुद के चुनाव लड़ने के लिए उनके हाथ में 108 सीट होगी. लेकिन भाजपा को माफी देने के पक्ष में है साथ ही एक एमएलसी का पद का प्रस्ताव दिया है भाजपा के इस फार्मूले से जेडीयू को 115 सीट देने की है .जिसमें से अपने सहयोगी हमको 7 सीट देगी. इस बंटवारे के बाद जेडीयू के पास 108 बच्चे की भाजपा के पहले दिए इस फार्मूले को जेडीयू ने सिरे से नकार दिया है. भाजपा से 10 सीटें ज्यादा ही चुनाव लड़ना चाहिए .लेकिन सीट बंटवारे का पेंच की संभावना है. ऐसी चर्चा है कि रालोसपा और वीआईपी के मुकेश साहनी भी एनडीए में शामिल होंगे. अगर सीट बंटवारे पर लोजपा से सहमति नहीं बनी तो लोजपा एकला चलो की रणनीति अपना सकती है या महागठबंधन में भी शामिल होकर चुनाव भवन में उतर सकती है. उधर एनडीए की तरह महागठबंधन में भी कुछ साफ नहीं है सीट बंटवारे का फार्मूला यहां भी तय नहीं है. प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव पहले ही अपने दोनों सहयोगी रालोसपा और वीआईपी से किनारा कर लिया है. जिससे दोनों दलों में खलबली मची हुई है. वहीं कांग्रेस भी अभी तक सीट शेयरिंग नहीं होने से नाराज दिख रही है. कांग्रेस 90 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. लेकिन राजद की ओर से हरी झंडी नहीं मिल रही है. इस कारण कांग्रेस भी नाराज चल रही है. एक-दो दिन में अगर सीट पर सहमति नहीं बनी तो कांग्रेस एकला चलो की राह पर चलते हुए सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है.

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