बिहार में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है सीटें बचाना

महागठबंधन से अलग होने के बाद बिहार कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी सीटों को बचाए रखने की है। हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन पार्टी इस कवायद में जुट गई है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जिन 27 सीटों पर संगठन ने जीत दर्ज कराई है उन्हें हर हाल में बचाए रखा जाए।

इसके लिए बिहार कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी और विधान मंडल दल के नेता सदानंद सिंह अगले महीने से पंचायत से लेकर प्रखंड तक जाकर पार्टी नेताओं से फीडबैक लेने के लिए जिलों के दौरे पर निकलेंगे।

कांग्रेस के अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि संगठन बिहार के बदले हुए राजनीतिक हालातों को देख रही है। उसे इल्म है कि उसकी अगली लड़ाई सिर्फ भाजपा से नहीं जदयू से भी होगी। जिसके साथ मिलकर कांग्रेस ने पिछला चुनाव लड़ा और सत्ता में भागीदारी भी पाई।

कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता अपने दौरे के क्रम में यह देखेंगे कि जिन विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई उन सीटों को अगले चुनाव में बचाए रखने के लिए संगठन को क्या कदम उठाने होंगे। जातीय समीकरण से लेकर मतदाताओं का मिजाज भी इस दौरान परखा जाएगा।

दिसंबर महीने में नेताओं के जिलों का दौरा प्रारंभ होगा। दौरे के क्रम में जिलों में होने वाली बैठकों में पार्टी नेताओं और जिलाध्यक्षों को यह दायित्व भी सौंपा जाएगा कि वे अभियान चलाकर कांग्रेस कार्यकाल में हुई उपलब्धियां जनता तक पहुंचाए साथ ही केंद्र की वर्तमान सरकार की नीतियों और फैसलों की वजह से होने वाली परेशानियों की बाबत भी लोगों को जागरुक करें।

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