धर्मांतरित आदिवासियों को नहीं मिले आरक्षण का लाभः बिरसा पाहन

छोटानागपुर सरना समिति के अध्यक्ष बिरसा पाहन ने कहा कि आदिवीसी समाज की धर्म, संस्कृति, रीति रिवाज की रक्षा होनी चाहिए। वैसे लोग जो आदिवासी धर्म, संस्कृति और रीति रिवाजों को नहीं मानते हैं उन्हें एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इतना ही नहीं यदि को आदिवासी महिला गैर आदिवासी से विवाह करती है तो उसे भी एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
बता दें कि समिति की ओर से आज राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया गया साथ ही इस मामले को लेकर राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। समिति के अध्यक्ष बिरसा पाहन ने राज्यपाल से मांग की कि झारखंड में आदिवासी धर्म, संस्कृति, परंपरा की रक्षा करने वाले पाहन, मुण्डा, मानकी, प्रधान को अविलंब प्रोत्साहन राशि दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी का प्रमाण पत्र केवल खतियान के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि जांच पड़ताल करके आदिवासी संस्कृति, धर्म और रीति रिवाज को मानने वाले को ही एसटी का प्रमाण पत्र मिलना चाहिए।
उन्होंने राज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि धर्मांतरित आदिवासी को अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट, केरल हाइकोर्ट, गुवाहाटी हाइकोर्ट ने भी धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं देने का आदेश दिया है।

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