बन्धु तिर्की ने प्रदीप यादव को दी क्लीन चिट, दोषी कौन !

इस बार के राज्यसभा चुनाव में भी गड़बड़ी हुई है. वोट ख़रीदे और बेचे गए. झाविमो के प्रकाश राम ने तो क्रॉस वोटिंग की. उन्होंने स्वीकार भी लिया. उन्होंने कितने में वोट बेचा! या कोई और वज़ह थी, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा! लेकिन क्या प्रदीप यादव भी हॉर्स ट्रेडिंग के पार्ट थे! ऐसा विपक्ष के ही कुछ विधायकों का आरोप है. राजकुमार यादव ने अपनी पर्ची दिखा कर मत दिया, एक वोट नोटा को और दूसरा कांग्रेस को, इस तरह अपना वोट उन्होंने क्या जान बुझकर बर्बाद किया. क्या वह भी किसी धन्ना सेठ के दवाब में थे! माले लडाका पार्टी है और राजकुमार यादव खुद दशकों से अपने इलाके में किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. ऐसे में उनके मतदान में गड़बड़ी करने की खबर से वाम दलों के लोग भी भौंचक हैं.

ऐसे ही किसी ने मासस विधायक अरूप चटर्जी पर आरोप लगा दिया कि उन्होंने संथालिया से अपनी दोस्ती निभाई. इस सम्बन्ध में गौर करने लायक बात यह है कि अरूप चटर्जी की संथालिया से कोई नजदीकी रिश्ते कभी नहीं रहे. अरूप जिन कोयला कारोबारियों का विरोध करते हैं, संथालिया उनके समर्थक रहे हैं, दूसरी बात विचारधारा की है. अरूप हमेशा से झामुमो के साथ रहे हैं यानि विपक्ष के साथ. भाजपा के साथ की उनकी राजनीति कभी रही नहीं, हाल ही में मुख्यमंत्री रघुवर दास निरसा गए थे, वहां उन्होंने मासस मुक्त निरसा बनाने की बात की. ऐसे में भाजपा से लड़कर जीतने वाले अरूप के बारे में कौन दुष्प्रचार कर रहा है और क्यों! इस खेल को समझने की जरुरत है. इस बार भी मासस ने कांग्रेस के नेताओं को अपना पोलिंग एजेंट बनाने को कहा था, लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तकनिकी तौर पर इसे समझ नहीं सके.

खैर विधानसभा चुनावों के पहले अगर विपक्ष आपस में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का खेल खेल रहा है तो जाहिर है सियासी नुक्सान भी इन्हें ही होनेवाला है. अब विपक्षी नेताओं को चाहिए कि वो अपने बीच छुपे असली दुश्मन को ढूंढे. उस एक विधायक को ढूंढें, जिसने अपना वोट बेचा है !

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