बाबूलाल सही या भाजपा

झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है, उन्होंने जैेसे एक पत्र को लेकर भाजपा को घेरा, सत्ताधारी दल एकदम से दो-दो हाथ करने सामने आ गई। जानकार कहते हैं कि बाबूलाल ने भाजपा के दुखते रग पर जैसे हाथ रख दिया। बाबूलाल ने यूं ही नहीं इस चिट्ठी को सार्वजनिक तौर पर सबके सामने रखा है, वह यह जताने चाहते थे कि भाजपा के इस खेल में सूबे के मुख्यमंत्री रघुवर दास और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय के साजिश की बात आम जनता के बीच पहुुंचे, सरकार की साख पर भी सवाल उठे, और इस मकसद में शायद वे कामयाब हो गए।
सूबे में झाविमो से भाजपा में शामिल होने वाले 6 विधायकों को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए एक पत्र सार्वजनिक किया है। उन्होंने दावा किया है कि झाविमो के 6 विधायकों को बीजेपी ने प्रलोभन देकर अपनी पार्टी में शामिल किया है। इसके लिए सभी विधायकों को पैसे और पद भी दिए गए। उन्होंने कहा है कि पत्र से यह बात पूरी तरह साबित हो जाता है कि मामला पूरी तरह दल-बदल का है। विलय को लेकर की जा रही बात बेबुनियाद और मनगढंत है।
इसी सिलसिले में बाबूलाल ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एक मेमोरेंडम सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य में हुए पिछले असेंबली इलेक्शन के बाद उनके दल के छह विधायकों को बीजेपी में शामिल कराने में सबसे बड़ी भूमिका राज्य के मौजूदा सीएम रघुवर दास की थी। इस मामले में बड़े पैमाने पर रुपयों का लेनदेन भी हुआ। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र कुमार राय के द्वारा कथित रुपये लिखे गए एक पत्र में इस बात का जिक्र है, उस पत्र में जेवीएम छोड़कर बीजेपी जानेवाले विधायकों को 11 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने कहा है कि पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि पैसे किसने दिए और किसकी निगरानी में दिए गए।
बाबूलाल ने कहा है कि चुनाव के ठीक बाद बीजेपी ने सबसे पहले पद और पैसे का सरकारी दुरुपयोग किया और उनके विधायकों को तोड़ते हुए संविधान की धज्जियां उड़ा दी। मरांडी ने कहा कि दसवीं अनुसूची में कहीं कोई इजाजत नहीं होती कि एक विधायक दल में जा सके।
निर्दलीय विधायक भी अगर किसी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करें तो उसकी सदन से सदस्यता चली जाती है। इसमें पैसे का लेन-देन हुआ है और पद का प्रलोभन दिया गया। पद तो साफ दिखता है, उसमें दो लोगों को मंत्री बनाया, जबकि तीन लोगों को बोर्ड निगम में पद दिया गया।
यहां तक की मरांडी ने कहा है कि तीन सालों से मेहनत करते-करते एक पत्र मिला है। उस समय प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र कुमार राय थे, जिन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखा कि कुल 11 करोड़ रुपये नगद उपलब्ध कराया गया और सभी विधायकों से प्राप्ति पर्ची रघुवर दास को सौंप दी गयी। साथ ही भाजपा में आने वाले सभी झाविमो के विधायक को शेष राशि भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के तीन साल बाद रघुवर दास द्वारा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी ली गई है।
मरांडी ने कहा है कि लोकतंत्र पर यह बड़ा कलंक है। चूंकि इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हुए हैं, इसलिए पत्र में जितने लोगों के नाम हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। उनमें आदेशानुसार उत्तराखंड के मौजूदा सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावे सभी छह विधायकों की सदस्यता समाप्त होनी चाहिए और इसके लिए गवर्नर को पहल करने की जरुरत है वह इसके लिए स्पीकर को निर्देशित करें, क्योंकि इससे बड़ा और क्या प्रमाण हो सकता है। यह मामला बड़े लोगों से जुड़ा है इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
इस पूरे मामले पर भाजपा ने भी पलटवार किया है प्रदेश बीजेपी ने बाबूलाल मरांडी को जनता की अदालत में माफी मांगने को कहा है। बीजेपी ने कहा है कि वह कोर्ट का सहारा लेगी। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय ने कहा है कि बाबूलाल मरांडी दूसरे केजरीवाल साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि बाबूलाल मरांडी को जनता के सामने माफी मांगनी चाहिए। अगर वह माफी नहीं मांगते हैं तो भाजपा कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी और उन्हें कोर्ट में माफी मांगना पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि खुद बाबूलाल मरांडी से उनकी फोन पर विलय को लेकर बात हुई थी।
कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि बाबूलाल मरांडी की मानसिक स्थिति गड़बड़ा गई है और वह अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरांडी के खिलाफ अवमानना का केस दर्ज करेंगे। विधायक अमर बाउरी ने कहा कि जब उनलोगों के निर्वाचन के बाद मरांडी के साथ पहली बैठक हुई तब पहली बार बाबूलाल मरांडी ने बीजेपी में झाविमो के विलय की प्रस्ताव को रखा। बाउरी ने दावा करते हुए कहा कि इतना ही नहीं दिसंबर के अंतिम हफ्ते में मरांडी की मुलाकात दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई।
उसी बैठक की बुनियाद पर मरांडी ने विधायकों के साथ विषय को रखा वहां से विलय प्रस्ताव को लेकर बात प्रारंभ हुई। बाउरी ने कहा है कि वो निर्वाचित विधायक हैं न की मनोनीत और इस बात का फैसला 2019 के असेंबली इलेक्शन में होगा।
इस मामले पर विधायक नवीन जायसवाल ने कहा है राज्य के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए राजनीतिक स्थिरता देने के मकसद से यह विलय किया गया था। मरांडी के द्वारा जारी पत्र के माध्यम से एक झूठी साजिश रची गई है आने वाले वाले समय में जनता इसका करारा जवाब देगी।

 

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