सरना धर्मावलंबियों को भी मिले अलग धार्मिक पहचानः बाबूलाल

कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म के रूप में मान्यता देने के बाद झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने सरना धर्मावलंबियों के लिए सरना धर्म को एक अलग धर्म के रूप में मान्यता देने की मांग की है। झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि कर्नाटक में 17 फीसदी लिंगायत समुदाय की जनसंख्या है। लिंगायत समुदाय के लोग धार्मिक अल्पसंख्यक की मान्यता प्राप्त करने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। वर्षों से लिंगायत समुदाय की मांग को ध्यान में रखकर कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में 7 सदस्य टीम गठित की थी। जिसने इसी माह में कर्नाटक सरकार को रिपोर्ट समर्पित किया था। इस रिपोर्ट के आलोक में कर्नाटक सरकार द्वारा अपने मंत्रिमंडल की बैठक में कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर लिंगायत समुदाय को एक अलग धार्मिक पहचान के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया एवं इस प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में भी सरना धर्म को मानने वाले लोग धर्म को अलग धर्म के रूप में मान्यता के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। सरना धर्मावलंबी लोग सरना धर्म को अलग धर्म के रूप में मान्यता के लिए राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक अपनी आवाज को समय-समय पर पहुंचाते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने इसी तर्ज पर झारखंड सरकार से मांग किया है कि कर्नाटक सरकार द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय की तरह झारखंड सरकार सरना धर्मावलंबियों के लिए सरना धर्म को एक अलग धर्म के रूप में मान्यता देने के लिए मंत्रिमंडल में निर्णय लेकर इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजें।

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