क्या सचमुच दूर जा रहे हैं तेजस्वी और तेजप्रताप

देश में कई ऐसे सियासी परिवार हैं, जहां सत्ता की कमान अपने हाथ में लेने को लेकर आपसी लड़ाई जगजाहिर हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह का है।
मुलायम सिंह के कुनबे में जिस प्रकार सत्ता के लिए कलह हो रहा है वह किसी से अब छिपा नहीं है। तामिलनाडु में भी करुणानिधि के निधन के साथ ही उनके बेटों के बीच जारी लड़ाई देश के सामने है। अलागीरी और स्टालिन जिस प्रकार एक-दूसरे के खिलाफ हल्लाबोल रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सत्ता के लिए सब जायज है वाली कहावत आज भी मौजू है।

इन सब के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव के घर के अंदर से जो खबरें आ रही हैं। उससे सियासी हलकों में कई प्रकार की बातें की जा रही हैं। हालांकि इस बारे में कभी किसी परिवार के द्वारा कुछ नहीं कहा गया है लेकिन समय-समय पर इसकी झलक देखने को मिल ही जाती है। कुछ मुद्दों और कुछ आयोजनों पर भी इसकी झलक देखने को मिल जाती है।
ऐसी ही झलक एक बार फिर से लालू परिवार में देखने को मिली है। हालांकि इससे भी राजद नेता इनकार कर रहे हैं। लेकिन बिहार के राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का बाजार गरम है। और यह सब यूं ही शुरू नहीं हुआ। दरअसल पिछले दिनों राजद की महत्वपूर्व बैठक हुई थी। चुनाव से पहले इस बैठक को काफी अहम माना गया है। क्योंकि महागठबंधन को लेकर कई फैसले लिए गए हैं।
देखा जाय तो बिहार की राजनीति में फिलहाल कई मुद्दे गरम हैं। जिसमें आरक्षण का मुद्दा सबसे अहम है। इसके साथ ही महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर भी राजद की बैठक काफी महत्वपूर्ण थी। ऐसा इसलिए की राजद की इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ सभी वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। इसमें शिवानंद तिवारी, रघुवंश प्रसाद, जगदानंद सिंह जैसे नेता शामिल हुए थे।
वहीं, लालू परिवार से भी तेजस्वी यादव के आलावा राबड़ी देवी और मीसा भारती भी बैठक में शामिल हुई थीं। बताया जाता है कि तेजस्वी यादव इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। लेकिन सबसे अहम बात यह थी कि राबड़ी देवी और मीसा भारती शामिल तो हुए थे लेकिन लालू यादव के बड़े बटे तेज प्रताप यादव इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
बताया जाता है कि तेज प्रताप यादव बैठक के दिन पटना में ही थे और शायद उस वक्त भी वह घर पर ही थे लेकिन वह राजद की इस अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। इस खबर के आने के बाद से राजद समेत बिहार के सियासी गलियारों में लालू परिवार में खटपट की चर्चा सामने आने लगी है।
सियासी जानकार बताते हैं कि लालू परिवार के अंदर आपसी संघर्ष की बात काफी समय से उठी हुई हैं। तेज प्रताप यादव ने कई बार सार्वजनिक रूप से राजद नेताओं पर ही निशाना साधा है। उन्होंने यह भी कहा था कि राजद में उनकी ही बात नहीं सुनी जा रही है। तेज प्रताप ने पार्टी के प्रति अपना गुस्सा सोशल मीडिया पर भी निकाल चुके हैं। यहां तक की उन्होंने राजनीति को त्यागने तक की बात कर दी थी।
हालांकि सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तेज प्रताप ने कहा था कि उनके ट्विटर को हैक कर लिया गया था। और बीजेपी वालों ने हैक करवाकर ट्विट पोस्ट किया गया है। उन्होंने खुद ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है।
बहरहाल, इसके बाद तेजप्रताप के गुस्से पर लिपापोती की गई और तेजप्रताप ने तेजस्वी को मीडिया के सामने अर्जुन बताया और खुद को कृष्ण बताकर अर्जुन का सारथी कह भाई प्रेम को जाहिर करने लगे। तेज प्रताप यादव ने राजद के सीनियर नेताओं के खिलाफ भी बोल चुके हैं। ऐसे में हाल ही में राजद की अहम बैठक में तेज प्रताप यादव का शामिल नहीं होने से पारिवारिक संघर्ष की झलक एक बार फिर से दिख रहा है।
राजनीतिक चर्चाओं के दौर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने भी तंज कसते हुए कहा है कि राजद परिवार में महाभारत छिड़ चुका है। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप घर पर रहते हुए भी राजद की बैठक में यहां तक की भारत बंद में भी शामिल नहीं हुए। यह पारिवारिक संघर्ष जल्द ही गुल खिलाने वाला है।

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