सरकार गिना रही उपलब्धियां, भूख से मर गई सावित्री

प्रदेश के हुक्मरान एक ओर मोदी सरकार की 4 साल की उपलब्धियों की बखान कर रहे हैं, ढूंढ-ढूंढकर कामयाबियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है वहीं दूसरी ओर एक महिला भूख से तड़पकर मर जा रही है। सरकार का पूरा अमला एक बार फिर इस पूरे मामले की लीपापोती करने में जुट गया है। क्योंकि उसे पता है कि अब चुनाव नजदीक है और विपक्षी दल कहीं इसे मुद्दा न बना दें, तो जितना जल्द हो सके इसे प्रशासनिक पैंतरे में उलझाकर बीमारी या कोई और मामला साबित कर दिया जाए जैसे पहले भी किया गया है। बता दें कि पिछले वर्ष इसी प्रकार एक बच्ची संतोषी ने भी भूख से दम तोड़ दिया था। उस समय भी खूब हंगामा हुआ लेकिन सरकार के प्रशासनिक अमले ने ऐसा खेल खेला की वह केस तफ्तीश की फाइलों में दबकर गुम हो गया।

बता दें कि यह ताजा मामला गिरिडीह का है जहां 58 साल की एक महिला की भूख से मौत हो गई। महिला काफी दिनों से भूखी थी और उसके पास राशन कार्ड भी नहीं था। जिस महिला की कथित तौर पर भूख से मौत हुई है उसका नाम है सावित्री देवी। डुमरी की एमओ शीतल प्रसाद का ​कहना है कि, अधिकारियों की लापरवाही के कारण मृत महिला का राशन कार्ड नहीं बनाया जा सका। राशन कार्ड ना होने की वजह से महिला को राशन पाने में दिक्कत हो रही थी जिस वजह से उसकी मौत हो गई।

सावित्री देवी की मौत के बाद उनकी बहु सरस्वती देवी ने बताया कि उन्होंने राशन कार्ड बनावाने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन किसी ने कभी ध्यान नहीं दिया। उनकी सास सावित्री पिछले 3 दिनों से भूखी थी। उनके दोनों बेटे किसी तरह बाहर जाकर कमाते थे लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनसे बात नहीं हो पा रही थी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कुछ दिनों से वे सिर्फ भीख मांगकर ही खाना खा पा रहे थे।

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