अन्ना की मांग उचित, किसानों को मिले पेंशन : कुशवाहा

अन्ना हजारे के बिहार आने के पहले ही उनकी मांगों पर मोहर लगने लगा है। एनडीए के प्रमुख सहयोगी रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने अन्ना की किसानों को पेंशन देने की मांग का समर्थन करके नीतीश कुमार की परेशानी बढ़ा दी है। उपेन्द्र कुशवाहा के समर्थन के बाद नीतीश कुमार के लिए इस मांग को ठुकराना बेहद मुश्किल होगा।

रालोसपा के अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि वो गंभीरता से यह महसूस करते हैं कि बिहार के वृद्ध किसानों और खेतिहर मजदूरों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। इस बारे में पहले भी समय-समय पर चिंता व्यक्त की गयी है। कुशवाहा ने कहा कि बिहार के किसानों की दुर्दशा पर वो लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इनके अनुसार जब तक अन्नदाता खुश नहीं होंगे, ना हमारे गाँव खुश होंगे और ना ही हमारा समाज। उन्होंने कहा कि जीवन भर अन्न उपजाकर हमारा पेट भरने वाले ये अन्नदाता जीवन की सांध्यवेला में आखिर कहाँ जाएँ! किसे अपनी वेदना सुनाएँ। अन्ना ने इनकी आवाज़ उठायी है, बिहार के किसानों में इससे उम्मीद की रौशनी जगी है। इसकी अब और अनदेखी उचित नहीं है।

कुशवाहा ने कहा कि अन्ना हजारे जी ने उचित मांग रखी है और मैं इसका पुरजोर समर्थन करता हूँ। उन्होंने कहा कि वृद्ध किसानों के पेंशन की राशि कितनी हो, यह तकनिकी प्रश्न है। बहुत सारे विषय इससे जुड़े हुए हैं, और मेरी भूमिका अभी तय करने की नहीं है, पर मुझे लगता है कि सरकार को अन्ना हजारे जी और किसानों के साथ बैठकर अविलम्ब इसका रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो सत्ता में आये तो इस मांग पर तुरंत विचार किया जायेगा।

उपेन्द्र कुशवाहा के किसानों के पेंशन की मांग का समर्थन करने के बाद राज्य सरकार पर इस बात के लिए प्रेशर और बढ़ गया है कि वो किसानों के लिए इस बात का एलान करें। अब देखना यह है कि इस विषय पर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है!

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