अन्ना के आने से ध्वस्त होंगे कई समीकरण!

18 दिसम्बर को पटना में अन्ना हजारे की दहाड़ क्या कई राजनीतिक समीकरण को उलट पुलट कर देगी! कई नेताओं की प्रतिक्रिया देखकर तो ऐसा ही लगता है। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी सत्ताधारी जदयू और भाजपा को ही होनेवाली है, क्योंकि वृद्ध किसानों और खेतिहर मजदूरों को 5000 रुपया पेंशन देने की मांग तत्काल सरकार का सरदर्द बढाने वाली है। यह ऐसा मुद्दा है जिसपर सरकार की स्थिति सांप छुछुंदर वाली है। सरकार अगर इस मांग को नजरंदाज करेगी तो बिहार के किसान पार्टी और सरकार के खिलाफ जायेंगे। अगर नीतीश तुरंत इस मांग को स्वीकार करेंगे तो सवाल उठेगा कि आखिर राज्य सरकार इतने दिनों तक क्यों चुप थी! अन्ना की असंदिग्ध ईमानदारी उनके उठाये गए सवालों को बेहद प्रासंगिक बना देती है, जिसे ठुकरा कर नीतीश सरकार आ बैल मुझे मार तो नहीं ही करेगी। अन्ना के उठाये गए सवालों को विपक्ष की राजनीतिक चाल कहकर खारिज भी नहीं किया जा सकता। हर शख्स जानता है कि अन्ना समाज को कुछ देने के लिए कोई मांग रखते हैं, उनका अपना कोई सियासी एजेंडा नहीं होता, तभी तो देश उनके कहे पर विश्वास कर सकता है।

अन्ना टीम के बिहार प्रभारी संजय सिसोदिया कहते हैं कि कहने को लोकायुक्त हैं बिहार में, पर यह पद नख-दन्त विहीन है। क्या लोकायुक्त कार्यालय इस अवस्था में किसी भ्रष्ट आईएएस पर हाथ डाल सकता है। तो ऐसे दिखावे की क्या जरुरत है! अन्ना ऐसे लोकायुक्त की बात करेंगे जो मुख्यमंत्री पर भी हाथ डाल सकने में सक्षम हों। अगर नीतीश जी ईमानदारी की बात करते हैं तो उन्हें एक शक्तिशाली लोकायुक्त से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। जो भी पार्टी इसका विरोध करेगी, तो यह मेसेज जायेगा कि कुछ है जो वो छिपाना चाहते हैं।

अन्ना राईट टू रिजेक्ट और राईट टू रिकॉल के अभियान पर भी जनता को जागरूक करेंगे। वो बिहार की युवा शक्ति को बतायेंगे कि चुनाव सुधार क्यों जरुरी है! युवा अन्ना पर भरोसा करते हैं और चुनाव सुधार के बहाने उनसे जब बात होगी तो कई एजेंडा सामने आएगा।
किसान संगठनों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठेंगे। इतने दिनों तक आखिर बिहार के किसान संगठनों ने इस सवाल को क्यों नहीं उठाया! कोसी क्षेत्र में बाढ़ के बाद किसानों के खेतों पर बालू बिछा है। प्रभावित किसान खेती नहीं कर सकता, वह अपने ही खेत से बालू नहीं हटवा सकता। जब सरकारी अधिकारी को छुट्टी होगी और वो जमीन पर जायेगा तभी किसान के खेत से बालू निकाला जायेगा। अन्ना ऐसे तमाम सवाल उठाएंगे। जाहिर है जब ये सवाल उठेंगे तो कई सियासी समीकरण बदलेंगे।

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