लालू की अदा के तो सभी दीवाने हैं

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद आज अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं परिवार के लिए खुशी का मौका है। उन्हें बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुभकामनाएं दी हैं। लालू आज देश की सियासत के एकमात्र ऐसे शख्सियत हैं जो तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी अपनी पकड़ और जनाधार के बलबूते सियासी आसमान पर छाए हुए हैं।
जेपी आंदोलन से अपनी राजनीति की शुरूआत करने वाले लालू प्रसाद का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। बिहार की राजनीति में उन्हें आज गरीबों- मजलूमों का मसीहा कहा जाता है लेकिन इसके लिए उन्होंने ने लंबी लड़ाई लड़ी है। लालू की बेबाकी और जमीनी पकड़ ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक अलग नेता का पहचान दिलायी। उनका जूझारू अंदाज 71 की उम्र में भी कायम है वे अपने विरोधियों के आगे अगर टिके हैं तो इसके पीछे उनकी यही इच्छाशक्ति है।
लालू प्रसाद ने अपनी जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों को अपनी ताकत बनाई है। शायद ये बात बहुत ही कम लोगों को पता है कि लालू के घर की माली हालत ठीक नहीं थी। बताया जाता है कि लालू स्कूल फीस के तौर पर टीचर को हर शनिवार को गुड़-चावल दिया करते थे। वहीं लालू ने अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए चाय की दुकान में बतौर हेल्पर भी काम किया। अपनी जिद और कुछ करने की लगन की बदौलत उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और पटना यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री से बीए किया और 1971 में छात्र संघ चुनाव लड़े और सेक्रेटरी बने। लालू ने उसके बाद एलएलबी में भी एडमिशन लिया। जेपी के विचारों से प्रभावित होकर राजनीति में कूदे और एक दिन बिहार के सीएम भी बने।

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