बगावती सुर कहीं बिगाड़ ना दे नीतीश का खेल!

नीतीश कुमार के महागठबंधन से दूर और बीजेपी के करीब आने के जो कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वह बुधवार (26 जुलाई) को सच साबित हो ही गया। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और आज गुरुवार (27 जुलाई) को दोबारा सीएम पद की शपथ ले ली। बहरहाल यह पहली बार नहीं है जब नीतीश ने अपने वजूद को खतरे में पाकर बीजेपी का सहारा लिया हो। जोड़-तोड़ की राजनीति में उन्होंने महारत हासिल कर ली है, यह कहना शायद गलत नहीं होगा।

अब नीतीश कुमार के सामने बस विधानसभा में बहुमत पेश करने की चुनौती है। 28 जुलाई को विधानसभा में बहुमत पेश करना है। सुशील मोदी ने बीजेपी और जेडीयू के पास 132 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है, लेकिन नीतीश के इस फैसले के खिलाफ जेडीयू में लगातार बगावती सुर दिखाई दे रहे हैं।

जानकारों की मानें, तो जदयू के 71 में 18 विधायक राजद का समर्थन कर सकते हैं। इनमें से 5 विधायक मुस्लिम हैं और 11 विधायक यादव समुदाय से हैं। दो अन्य विधायक भी राजद के संपर्क में हैं। पार्टी विधायक बिजेंद्र यादव ने कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश और लालू को एक साथ चुना था। अब नीतीश के पास सबसे बड़ी चुनौती बहुमत की ही है।

नीतीश कुमार के इस फैसले का पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव और राज्यसभा सांसद अली अनवर का विरोध किया है. शरद यादव ने कहा कि इस फैसले से गलत संदेश जाएगा, तो वहीं अली अनवर ने कहा कि मेरी अंतरात्मा इस फैसले के साथ नहीं है। हालांकि जेडीयू नेता केसी त्यागी ने शरद यादव से फोन पर बात की है, उन्हें मनाने की कोशिश की है। ऐसे में अंकों का गणित महत्वूर्ण हो जाता है। जेडीयू विधायकों पर शरद यादव का अपना प्रभाव है। नीतीश कुमार ने अली अनवर को राज्यसभा भेजा, लेकिन अली अनवर की नाराजगी बताता है कि जेडीयू में सब ठीक नहीं है।

दूसरी ओर लालू यादव भी चुप बैठने वाले नहीं हैं। लालू बहुमत परीक्षण के समय अपनी पूरी ताकत से खेल सकते हैं। अब देखना ये है कि जेडीयू में टूट होती है कि नहीं, हालांकि इसकी संभावना बनती दिख रही है।

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