बवाना में BJP की उम्मीदों पर चली झाड़ू

-बवाना में BJP की अब तक की सबसे बड़ी हार
बवाना में बीजेपी को अब तक की सबसे बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा है। 1998 से लेकर अब तक कभी भी बीजेपी का वोट शेयर 30 पर्सेंट से कम नहीं रहा। बवाना उपचुनाव में बीजेपी के परंपरागत वोटर्स टूट गए और बीजेपी का वोट पर्सेंट गिरकर 27.2 फीसदी रह गया। यह आलम तब है, जब करीब 4 महीने पहले ही बीजेपी ने एमसीडी चुनाव जीता है और 32.47% वोट हासिल किए हैं। कुछ महीनों के अंदर ही बीजेपी का वोट प्रतिशत उसके हाथों से निकल गया। विश्लेषकों का मानना है कि जल्द ही बीजेपी ने अपनी रणनीति और कार्यशैली में बदलाव नहीं किया तो दिल्ली में उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।

वहीं आम आदमी पार्टी ने बवाना से बड़ी जीत दर्ज की है। आप के उम्मीदवार राम चंदर ने बीजेपी उम्मीदवार वेद प्रकाश को 24 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। वहीं शुरुआती बढ़त बना लेने के बावजूद कांग्रेस को इस बार भी निराशा हाथ लगी पार्टी उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार तीसरे नंबर पर रहे। इससे पहले वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही बवाना में दिलचस्प मुकाबले देखने को मिला यहां वोटों की गिनती शुरू होते ही कांग्रेस ने बढ़त बना ली थी और सात राउंड तक पार्टी के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार आगे बने रहे। लेकिन आठवे राउंड की गिनती शुरू होते ही उलटफेर देखने को मिला। बता दें दिल्ली की बवाना सीट आम आदमी पार्टी के विधायक वेद प्रकाश शर्मा के इस्तीफा देने से खाली हुई है। बाद में शर्मा ने ही बीजेपी उम्मीदवार बनकर इस सीट से चुनाव लड़ा।

आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के लिए यह आम चुनाव कई मायनों में अहम था और पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से केजरीवाल बैकफुट पर थे, ऐसे में यह नतीजे उनके लिए काफी राहत की बात है। देखा जाए तो पिछले 4-5 महीने केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए काफी चुनौती पूर्ण रहे हैं। पहले तमाम दावों और वादों के बाद भी पार्टी पंजाब विधानसभा चुनावों में अपेक्षाकृत प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। हालांकि पार्टी यहां मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी मगर पार्टी पंजाब में सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त थी। इसके बाद हुए दिल्ली नगर निगम के चुनावों में भी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के सामने नहीं टिक सकी, और बीजेपी तीनों ही निगमों में फिर से जीत दर्ज करने में कामयाब रही। पार्टी ने इस हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा, जिसके बाद उनकी काफी किरकिरी भी हुई। आम आदमी पार्टी इससे पहले अप्रैल में हुए राजौरी गार्डन उपचुनाव में भी अपना सीट नहीं बचा सकी थी।

मगर इस दौरान केजरीवाल की चुप्पी साध ली और शायद यह भी समझ गए कि हर बात पर मोदी पर आरोप मढ़ने की नीति शायद अब नहीं चलने वाली। और इसके बाद केजरीवाल ने शांत रह कर फिर से काम करना ही बेहतर समझा।

अब यह नतीजे जरूर केजरीवाल के खोए हुए आत्मविश्वास को वापस लाने में महत्वपूर्ण होंगे। मगर इस नतीजे के बाद केजरीवाल भी यह समझ लें तो बेहतर होगा कि लोग उनकी आरोप प्रत्यारोप कि राजनीति से जनता ऊब गयी है और उनका शांत रह कर काम करना लोगों को ज्यादा भा रहा है।

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