IIT के छात्र बदलेंगे, पिछड़ों की तकदीर!

देश भर में पिछड़े जमात से आने वाले लोगों में अपनी उपेक्षा को लेकर उबाल है। देश के कई हिस्सों में कई संगठन इसे लेकर सड़क पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं। अपने-अपने तरीके से समाज की मुख्यधारा में आने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं। कहीं आर्थिक, सामाजिक स्तर पर बदलाव की मांग हो रही है तो कहीं अपने प्रतिनिधित्व को लेकर जद्दोजहद की जा रही है। बदलाव के लिए ये संघर्ष अब जोर पकड़ता जा रहा है। पिछड़े और दलित संगठनों का प्रतिरोध अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। सरकारों को इसके लिए अपने दृष्टिकोण में बदलाव करने ही होंगे। समाज में सदियों से चला आ रहा भेदभाव और अनदेखी का परिणाम देश को कई अहम क्षेत्रों में पीछे धकेल रहा है। समाज के सर्वांगीण विकास के संकल्प को कुंद कर रहा है। अगर बात झारखंड कि की जाए तो यहां भी पिछड़ों के साथ जो भेदभाव किया जा रहा है वह राज्य में असमानता की ऊंची दीवार खड़ी कर रहा है। 50 फीसदी आबादी को मात्र 14 फिसदी आरक्षण दिया जा रहा है उसमें भी कई जिले ऐसे हैं जहां पिछड़ों का आरक्षण शुन्य कर दिया गया है। ये भेदभाव तो है ही, सरकारों की घोर नाकामी भी है कि उन्होंने आजतक आरक्षण का सही मूल्यांकन भी नहीं किया।

ऐसे समय में जब पिछड़ों के वाजिब हक पर सरकारें चुप हैं, उनकी लड़ाई को दबाने की कोशिश कर रही हैं। हाशिए पर पड़े इस समाज को आगे बढ़ने के उनके मौलिक अधिकार को कुचलने पर आमादा हैं। एक नए परिवर्तन का आगाज हो रहा है। आईआईटी के 50 पूर्व छात्रों ने देश में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है। इस राजनीतिक पार्टी के जरिए ये सभी पूर्व आईआईटी छात्र एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों के अधिकार के लिए काम करेंगे और उनके अधिकारों के लिए पार्टी का गठन करेंगे। इन 50 छात्रों का संगठन चुनाव आयोग से अपनी राजनीतिक पार्टी की अनुमति का इंतजार कर रहा है। आईआईटी के इन पूर्व छात्रों की पार्टी का नाम बहुजन आजाद पार्टी होगा। हालांकि पार्टी अभी चुनाव लड़ने की किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है और वह 2019 के लोकसभा चुनाव में नहीं उतरना चाहती है। दिल्ली आईआईटी में वर्ष 2015 में पढ़े नवीन कुमार का कहना है कि हम 2020 में बिहार विधानसभा में चुनाव लड़ने से अपने अभियान की शुरुआत करेंगे और इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव पर अपना लक्ष्य केंद्रित करेंगे।

कहा जा रहा है कि इस संगठन का फोकस समाज में वर्षों से हाशिए पर पड़े वंचित समुदायों के मांगो को लेकर लड़ाई लड़ने की है। पार्टी ने डॉ भीमराव अंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस, एपीजे अब्दुल कलाम सहित कई अन्य नेताओं की तस्वीरें लगाकर सोशल मीडिया पर प्रचार भी शुरू कर दिया है। वहीं, पार्टी ने आगे की रणनीति भी बनाई है जिसके अनुसार कहा गया है कि पिछड़ों के नाम पर राजनीति नहीं करेगी, बल्कि पिछड़ों का उनका वाजिब हक दिलाएगी। 25-40 साल के पढ़े-लिखे युवा ही उनके उम्मीदवार होंगे। पार्टी एसटी, एससी, ओबीसी और महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाएगी। जिन लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज होगा, उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा।

उधर, बहुजन आजाद पार्टी के संस्थापक सदस्य अखिलेश की मानें तो आईआईटी जैसे संस्थान में भी पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है। यहां सभी छात्रों को समान अधिकार नहीं है। आरक्षण से एडमिशन पाने वालों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता। उन्हें बड़े प्रोजेक्ट नहीं दिए जाते। वहां हर पिछड़ा वर्ग का छात्र उपेक्षित महसूस करता है। 1990 से पहले का दौर देखा जाय तो पता चल जाएगा कि आरक्षण के बावजूद पिछड़े वर्ग के बच्चे आईआईटी में क्यों नहीं थे।

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